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नवरात्रों में दुर्गा सप्तशती पाठ देगा अधिक लाभ, जानें क्या है पाठ विधि

शास्त्रों के अनुसार पाठ करने के दौरान कुछ अध्यायों में उच्च स्वर, कुछ में मंद और कुछ में शांत मुद्रा में बैठकर पाठ करना अच्छा होता है. देवी कवच उच्च स्वर में और श्रीअर्गला स्तोत्र का प्रारम्भ उच्च स्वर और समापन शांत मुद्रा से करना चाहिए

Updated on: 10 Oct 2018, 10:23 AM

नई दिल्ली:

श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ नवरात्रों में आपके घर भी खुश-समृधि और शांति में वृद्धि कर सकता है. दुर्गा सप्तशती के पाठ करने का अलग तरीका है. शास्त्रों के अनुसार पाठ करने के दौरान कुछ अध्यायों में उच्च स्वर, कुछ में मंद और कुछ में शांत मुद्रा में बैठकर पाठ करना अच्छा होता है. देवी कवच उच्च स्वर में और श्रीअर्गला स्तोत्र का प्रारम्भ उच्च स्वर और समापन शांत मुद्रा से करना चाहिए.

वाकार विधि के अनुसार करें अध्यायों का पाठ-

प्रथम दिन एक पाठ प्रथम अध्याय, दूसरे दिन दो पाठ द्वितीय, तृतीय अध्याय, तीसरे दिन एक पाठ चतुर्थ अध्याय, चौथे दिन चार पाठ पंचम, षष्ठ, सप्तम व अष्टम अध्याय, पांचवें दिन दो अध्यायों का पाठ नवम, दशम अध्याय, छठे दिन ग्यारहवां अध्याय, सातवें दिन दो पाठ द्वादश एवं त्रयोदश अध्याय करके एक आवृति सप्तशती की होती है.

संपुट विधि में ऐसे करें पाठ-

किसी विशेष प्रयोजन हेतु विशेष मंत्र से एक बार ऊपर तथा एक नीचे बांधना उदाहरण हेतु संपुट मंत्र मूलमंत्र-1, संपुट मंत्र फिर मूलमंत्र अंत में पुनः संपुट मंत्र आदि इस विधि में समय अधिक लगता है. लेकिन यह काफी लाभदायक होता है. अच्छा यह होगा कि आप संपुट के रूप में अर्गला स्तोत्र का कोई मंत्र ले लीजिए. साथ ही कोई बीज मंत्र जैसे ऊं श्रीं ह्रीं क्लीं दुर्गायै नम: ले लें या ऊं दुर्गायै नम: से भी पाठ कर सकते हैं.

नवरात्र पूजा विधि-

सर्वप्रथम- देवी भगवती को प्रतिष्ठापित करें। कलश स्थापना करें. दीप प्रज्ज्जवलन करें. ( अखंड ज्योति जलाएं यदि आप जलाते हों या जलाना चाहते हों) ध्यान रहे कि सर्वप्रथम अपने गुरू का ध्यान करिए. उसके बाद गणपति, शंकर जी, भगवान विष्णु, हनुमान जी और नवग्रह का.

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पाठ विधि की प्रक्रिया-

श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से पहले भगवान गणपति, शंकर जी का ध्यान करिए. उसके बाद हाथ में जौ, चावल और दक्षिणा रखकर देवी भगवती का ध्यान करिए और संकल्प लीजिए...हे भगवती मैं.....( अमुक नाम)....सपरिवार...( अपने परिवार के नाम ले लीजिए...)...गोत्र.( अमुक गोत्र)....स्थान ( जहां रह रहे हैं)... पूरी निष्ठा, समर्पण और भक्ति के साथ आपका ध्यान कर रहा हूं. हे भगवती आप हमारे घर में आगमन करिए और हमारी इस मनोकामना... ( मनोकामना बोलें लेकिन मन ही मन) को पूरा करिए। श्रीदुर्गा सप्तशती के पाठ, जप ( माला का उतना ही संकल्प करें जितनी नौ दिन कर सकें) और यज्ञादि को मेरे स्वीकार करिए. इसके बाद धूप, दीप, नैवेज्ञ के साथ भगवती की पूजा प्रारम्भ करें.