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Surya Arghya Vidhi in Nautapa: नौतपा में सूर्यदेव को जल चढ़ाने का तरीका क्या है? जानें सही नियम

Surya Arghya Vidhi in Nautapa: जानिए नौतपा में सूर्य देव को जल अर्पित करने की सही विधि. साथ ही जानें नौतपा में सूर्य देव को अर्घ्य देने के लाभ के बारे में.

Updated on: 26 May 2024, 08:09 PM

नई दिल्ली:

Surya Arghya Vidhi in Nautapa:  साल 2024 में नौतपा 25 मई से 2 जून तक रहेगा. इस दौरान गर्मी अपने चरम पर रहती है और इसे ही नौतपा कहा जाता है. हिंदू धर्म में इन 9 दिनों का विशेष महत्व होता है. ज्योतिष शास्त्र की मानें तो अगर इस दौरान सूर्यदेव की विधिपूर्वक पूजा की जाए तो इससे जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है. साथ ही घर में बरकत और खुशहाली में बढ़ोत्तरी होती है. लेकिन ये तभी  मुमकिन हो पाएगा जब आप सूर्यदेव को सही विधि से जल अर्पित करेंगे. ऐसे में आइए आज हम आपको बताते हैं नौतपा में सूर्य देव को जल अर्पित करने की सही विधि. साथ ही जानिए नौतपा में सूर्य देव को अर्घ्य देने के लाभ के बारे में. 

नौतपा में सूर्यदेव को अर्ध्य देने की विधि

सूर्योदय से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहन लें. उसके बाद भगवान सूर्य देव को जल अर्पित करें. जल में लाल फूल, अक्षत, कुमकुम और हल्दी अवश्य डालें. जल अर्पित करते समय अपना मुख पूर्व दिशा की ओर रखें. ज्योतिष में सूर्योदय के समय सूर्य देव को जल चढ़ाना सबसे शुभ माना गया है. मंत्र बोलते हुए अर्घ्य देना शुभ माना जाता है. इसलिए जल अर्पित करते समय सूर्य देव के मंत्रों या गायत्री मंत्र का जाप जरूर करें. मंत्र का उच्चारण सही से करें और एक पैर ऊपर उठा कर ही सूर्य देव को अर्घ्य दें. 

नौतपा में सूर्य देव को अर्घ्य देने के लाभ

सूर्यदेव को उदयकाल के समय अर्ध्य देना हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है. नौपता के समय सूर्यदेव को अर्ध्य देने का विशेष महत्व है. इस दौरान सूर्यदेव को अर्ध्य देने से कई फायदे होते हैं. सूर्यदेव की कृपा से रोग, शत्रु, भय से मुक्ति मिलती है. इसके साथ ही घर से दरिद्रता दूर होती है और स्वास्थ्य, धन, सुख-समृद्धि और सफलता की प्राप्त होती है. आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है. नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता बढ़ती है. ग्रहों की दशा में सुधार होता है. मन शांत होता है और एकाग्रता बढ़ती है. 

सूर्यदेव के मंत्र

ॐ सूर्याय नम: 
ॐ घृणि सूर्याय नम: 
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।
ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।
ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ ।

गायत्री मंत्र

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।।

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. न्यूज नेशन इस बारे में किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)