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Mangal Rajyog: बनने वाला है मंगल का महा राजयोग, रातोंराज बना देगा राजा !

Mangal Rajyog: मंगल ग्रह, जिसे अंगारक भी कहा जाता है, साहस, पराक्रम, ऊर्जा, भूमि, भवन, वाहन, और युद्ध का प्रतीक है. कुंडली में मजबूत मंगल महाराजयोग का निर्माण कर सकता है, जो जीवन में अनेक शुभ फल प्रदान करता है.

Updated on: 27 May 2024, 01:35 PM

New Delhi:

Mangal Rajyog: मंगल ग्रह को शक्ति, साहस, पराक्रम, भूमि, संपत्ति, युद्ध, भाई-बहन, पुलिस, सेना, और जमीन का देवता माना जाता है. ज्योतिष में, मंगल ग्रह का महत्वपूर्ण स्थान होता है. कुंडली में मंगल ग्रह की अच्छी स्थिति व्यक्ति को शक्ति, साहस, पद-प्रतिष्ठा, संपत्ति, और विजय प्रदान करती है. महाराजयोग कुंडली में ग्रहों की एक विशेष स्थिति होती है, जो व्यक्ति को राजसी जीवन, सत्ता, शक्ति, संपत्ति, और यश प्रदान करती है. महाराजयोग के लिए मंगल ग्रह का मजबूत होना अत्यंत आवश्यक है. मंगल ग्रह को मजबूत माना जाता है जब वह उच्च राशि में हो, स्वयं का स्वामी हो, अच्छी युति में हो, और दृष्टि अच्छी हो तो व्यक्ति रातोंरात राजा बन जाता है. 

कब बन रहा है मंगल का महा राजयोग ? (Mangal Gochar 2024)

मंगल का महा राजयोग 1 जून को बनने वाला है. ये महाशक्तिशाली राजयोग 12 जुलाई तक रहेगा. जिस जातक का कुंडली में ये स्थिति बनने वाली है उसके जीवन में चारों ओर से खुशियां, धन संपत्ति और अपार सफलता आएगी. 

मंगल महा राजयोग कैसे बनता है? (Ruchak Yog In Kundli)

मंगल ग्रह कुंडली में महा राजयोग कैसे बनाता है ये भी विस्तार से समझ लें.

मंगल ग्रह उच्च राशि में (मेष, वृश्चिक, मकर) या स्वकेंद्र (1, 4, 7, 10) में स्थित हो.

मंगल ग्रह किसी भी शुभ ग्रह (गुरु, शुक्र, बुध, चंद्रमा) से युति या दृष्टि संबंध बनाए.

कुंडली में कोई भी पाप ग्रह (राहु, केतु, शनि) मंगल ग्रह को नष्ट न कर रहा हो.

मंगल ग्रह का केंद्र स्थान में होना महाराजयोग के लिए बहुत शुभ माना जाता है. केंद्र स्थान में मंगल ग्रह व्यक्ति को शासन, प्रशासन, नेतृत्व, और प्रतिष्ठा प्रदान करता है. मंगल ग्रह का त्रिकोण स्थान में होना भी महाराजयोग के लिए शुभ माना जाता है. त्रिकोण स्थान में मंगल ग्रह व्यक्ति को पराक्रम, साहस, विजय, और संपत्ति प्रदान करता है. मंगल ग्रह का त्रिकोण स्थान में होना भी महाराजयोग के लिए शुभ माना जाता है. त्रिकोण स्थान में मंगल ग्रह व्यक्ति को पराक्रम, साहस, विजय, और संपत्ति प्रदान करता है.

रुचक योग क्या होता है ? 

रुचका योग वैदिक ज्योतिष में पंच महापुरुष योगों में से एक महत्वपूर्ण योग है. यह योग तब बनता है जब मंगल ग्रह किसी जन्मपत्रिका (कुंडली) में महत्वपूर्ण स्थान पर होता है. इस योग के बनने से व्यक्ति को अद्वितीय शक्ति, साहस, और नेतृत्व की क्षमता प्राप्त होती है. रुचका योग का फल व्यक्ति की कुंडली के अन्य ग्रहों की स्थिति पर भी निर्भर करता है. व्यक्ति अत्यंत बलवान और साहसी होता है. वह कठिन परिस्थितियों में भी डट कर सामना करने की क्षमता रखता है. रुचका योग वाले व्यक्ति में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता होती है. वे अपने कार्यक्षेत्र में उच्च पद प्राप्त करते हैं और दूसरों का नेतृत्व करते हैं. ये व्यक्ति उद्यमी होते हैं और अपने कार्यक्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूते हैं. उनका संघर्ष करने का दृढ़ निश्चय उन्हें सफलता की ओर ले जाता है. इन व्यक्तियों में आत्मविश्वास की कोई कमी नहीं होती. वे आत्मविश्वासी और दृढ़निश्चयी होते हैं. रुचका योग वाले व्यक्ति सैन्य, पुलिस और अन्य सुरक्षा सेवाओं में अच्छा प्रदर्शन करते हैं. वे बहादुर और साहसी होते हैं. इस योग के प्रभाव से व्यक्ति हर प्रकार की प्रतिस्पर्धा में विजय प्राप्त करता है. उसका व्यक्तित्व अत्यंत आकर्षक और प्रभावशाली होता है.

अगर कुंडली में इन सभी स्थितियों का पालन होता है, तो मंगल ग्रह महाराजयोग बनाता है. जिस जातक की कुंडली में ये महाराजयोग बनता है उस व्यक्ति को राजसी जीवन जीने का अवसर मिलता है. सत्ता, शक्ति, और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है. व्यक्ति को धन-संपत्ति मिलती है और अपार यश और सफलता मिलती है. समाज में मान-सम्मान बढ़ती है. महाराजयोग का प्रभाव कुंडली में अन्य ग्रहों की स्थिति और योगों पर भी निर्भर करता है. अगर कुंडली में कोई भी अशुभ योग हो, तो महाराजयोग का प्रभाव कम हो सकता है. अगर आप जानना चाहते हैं कि आपकी कुंडली में मंगल ग्रह महाराजयोग बनाता है या नहीं, तो आप किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से अपनी कुंडली दिखाकर पूछ सकते हैं.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. न्यूज नेशन इस बारे में किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)