Mahashivratri 2022: महाशिवरात्रि के दिन पूजन में वर्जित हैं ये चीज़ें, इस्तेमाल न करके भोलेनाथ के कोप से बचें

ये तो सभी लोग जानते हैं कि शिव पूजा में किन चीज़ों का उपयोग करना चाहिए लेकिन ये बहुत कम लोग जानते हैं कि कौन सी ऐसी वस्तुएं हैं जिनका इस्तेमाल शिव पूजा में वर्जित है और जिनके प्रभाव से कवरत का निष्फल हो जाता है.

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Gaveshna Sharma
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Shiv Shambhoo Mahadev

महाशिवरात्रि के पूजन में वर्जित हैं ये चीज़ें, निष्फल हो जाता है व्रत ( Photo Credit : Social Media)

भगवान शिव को प्रिय महाशिवरात्रि 2022 (Mahashivratri 2022) का पर्व इस बार 1 मार्च के दिन मनाई जा रही है. इस दिन भगवान शिव (Lord Shiv Puja) की पूजा-अराधना की जाती है. मान्यता है कि इस दिन भोलेनाथ की सच्चे मन से पूजा उपासना करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव परिवार की पूजा होती है. ये तो सभी लोग जानते हैं कि शिव पूजा में किन चीज़ों का उपयोग करना चाहिए लेकिन ये बहुत कम लोग जानते हैं कि कौन सी ऐसी वस्तुएं हैं जिनका इस्तेमाल शिव पूजा में वर्जित और अगर इसके पश्चात भी आप उनका उपयोग करते हैं तो आप महादेव के कोप के भागी बन सकते हैं. 

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भगवान शिव (Lord Shiv) को इस दिन चंदन, अक्षत, बेलपत्र, धतूरा और आंकड़े के फूल अर्पित करने चाहिए. भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए उनकी प्रिय चीजें ही पूजा के समय उन्हें भेंट करनी चाहिए. इतना ही नहीं, कहते हैं कि इस दिन घी, शक्कर और गेंहू के आटे से बने प्रसाद का भोग लगाना चाहिए. और साथ ही धूप और दीप से आरती करनी चाहिए. मान्यता है कि शिव जी पर गाय का कच्चा दूध अर्पित करना चाहिए. इन सब चीजों को करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है. वहीं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भोलेनाथ को कुछ चीजें भूलकर भी अर्पित नहीं करनी चाहिए. 

तुलसी 
शिव पुराण के अनुसार, जालंधर नाम का असुर भगवान शिव के हाथों मारा गया था. जालंधर को एक वरदान मिला हुआ था कि उसे अपनी पत्नी की पवित्रता की वजह से उसे कोई भी अपराजित नहीं कर सकता है. लेकिन जालंधर को मरने के लिए भगवान विष्णु को जालंधर की पत्नी तुलसी की पवित्रता को भंग करना पड़ा. अपने पति की मौत से नाराज़ तुलसी ने भगवान शिव का बहिष्कार कर दिया था.इसी वजह से तुलसी का प्रयोग शिव पूजा करने की मनाही है.

शंख
शास्त्रों में उल्लेख है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा में शंख भूलकर भी शामिल न करें. क्योंकि शंखचूर नामक असुर का वध भगवान शिव ने किया था. इसलिए उनकी पूजा में इसे शामिल करने की मनाही होती है. 

कुमकुम या रोली
इसके साख ही भगवान शिव को कुमकुम और रोली भूलकर भी न लगाएं. 

नारियल पानी
नारियल पानी से भगवान शिव का अभिषेक भूलकर भी न करें.

फूल
भगवान शिव के भक्तों को पूजा के दौरान केतकी और केवड़े के फूल का इस्तेमाल करने की मनाही होती है. साथ  ही, कनेर और कमल के फूल के अलावा लाल रंग के फूल भी प्रिय नहीं है. 

हल्दी
इस बात का भी ध्यान रखें कि भगवान शिव को भूलकर भी हल्दी अर्पित न करें. 

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