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Katchatheevu: कच्चातिवु द्वीप का ये है धार्मिक इतिहास, हिंदू और मुस्लिमों के लिए है बेहद खास

Katchatheevu: कच्चाथीवू द्वीप हिंदुओं और मुसलमानों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल है. यह द्वीप दो धर्मों के बीच भाईचारे का प्रतीक है.

Updated on: 06 Apr 2024, 12:16 PM

नई दिल्ली :

Katchatheevu: कच्चातिवु द्वीप भारतीय साहित्य और पौराणिक कथाओं में एक प्रमुख स्थान रखता है. इसे कच्चातिवु या काच्चातीपुरम भी कहा जाता है. धार्मिक दृष्टिकोण से, यह द्वीप भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय का जन्म स्थल माना जाता है. विभिन्न पौराणिक कथाओं के अनुसार, माँ पार्वती ने यहां उसका जन्म दिया था. कच्चातिवु द्वीप में कार्तिकेय मंदिर स्थित है, जो भक्तों के लिए प्रमुख धार्मिक स्थल है. यहां प्रतिदिन अनेक श्रद्धालु आएं और भगवान कार्तिकेय को पूजन करते हैं. इस धार्मिक स्थल का महत्व भारतीय संस्कृति में अत्यधिक है और लोग यहां आकर अपने आत्मिक और धार्मिक आवश्यकताओं को पूरा करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कच्चातिवु द्वीप पर भगवान कार्तिकेय की कृपा और आशीर्वाद हमेशा बना रहता है.

कच्चातिवु द्वीप का धार्मिक महत्व: 

हिंदुओं के लिए: रामायण के अनुसार, भगवान राम ने रावण से युद्ध करने के लिए इस द्वीप से सेतु बांधने का काम शुरू किया था. इस घटना का स्मरण करने के लिए, द्वीप पर रामेश्वरम मंदिर के समान शिवलिंग स्थापित किया गया है. द्वीप पर स्थित हनुमान मंदिर भी महत्वपूर्ण है. भगवान हनुमान को राम का सबसे भक्त माना जाता है, और यह माना जाता है कि उन्होंने द्वीप पर विश्राम किया था. कुछ हिंदुओं का मानना ​​है कि यह द्वीप भगवान शिव का निवास स्थान भी है. वे द्वीप पर शिवलिंग की पूजा करते हैं और द्वीप को पवित्र मानते हैं. 

मुसलमानों के लिए: द्वीप पर स्थित मस्जिद को "कच्चातिवु पीर मस्जिद" कहा जाता है. यह 17वीं शताब्दी में बनी थी और इसे हजरत अब्दुल्ला की कब्र के ऊपर बनाया गया था. हजरत अब्दुल्ला पैगंबर मोहम्मद के चाचा थे. उनकी मृत्यु के बाद, उन्हें कच्चातिवु द्वीप पर दफनाया गया था. मुसलमान द्वीप पर मस्जिद में नमाज पढ़ते हैं और हजरत अब्दुल्ला की कब्र पर चादर चढ़ाते हैं. 

कच्चातिवु द्वीप अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है. द्वीप पर सफेद रेत, नीले पानी और हरे-भरे पेड़ हैं. द्वीप पर कई दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें समुद्री कछुए, डॉल्फ़िन और पक्षियों की कई प्रजातियां शामिल हैं. यह द्वीप भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सीमा विवाद का विषय भी रहा है. 2017 में, दोनों देशों ने द्वीप पर संयुक्त विकास परियोजनाओं के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए. कच्चातिवु द्वीप एक संवेदनशील क्षेत्र है और भारत सरकार की अनुमति के बिना द्वीप पर जाना प्रतिबंधित है. कच्चातिवु द्वीप भारत और श्रीलंका दोनों के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान है. यह द्वीप दोनों देशों के लोगों को एकजुट करता है और साझा विरासत का प्रतीक है.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. न्यूज नेशन इस बारे में किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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