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जानें कब है अष्टमी और महानवमी का व्रत , ऐसे करें कन्‍या पूजन

यह नवरात्रि आठ दिनों का है. चैत्र शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि को महाअष्टमी मनाई जाती है और नवमी को महानवमी.

News Nation Bureau | Edited By : Drigraj Madheshia | Updated on: 27 Sep 2019, 12:40:39 PM

नई दिल्‍ली:

Ramnavmi in navratri 2019:यह नवरात्र आठ दिनों का है. चैत्र शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि को महाअष्टमी मनाई जाती है और नवमी को महानवमी. नवमी और अष्‍ठमी को कन्याओं का पूजन किया जाता है. नौ दिन व्रत रखने वाले नवरात्रि को कन्‍या पूजन के बाद व्रत का पारण करते हैं. वहीं चढ़ती-उतरती व्रत रखने वाले अष्‍टमी को कन्‍यापूजन के बाद पारण करते हें.

इस बार नवमी तिथि 13 अप्रैल की सुबह 8.19 बजे से 14 अप्रैल की सुबह 6.04 बजे तक है. इसलिए 13 अप्रैल दिन शनिवार को महानवमी का व्रत होगा. इस बार राम नवमी पुष्य नक्षत्र के योग में है. पुष्य नक्षत्र सभी 27 नक्षत्रों में सबसे सर्वश्रेष्ठ नक्षत्र माना गया है. भगवान राम का जन्म पुष्य नक्षत्र में हुआ था.

अष्टमी पूजा मुहूर्त- नवमी तिथि 13 अप्रैल की सुबह 8.19 बजे से 14 अप्रैल की सुबह 6.04 बजे तक भगवान राम का जन्म पुष्य नक्षत्र में हुआ था. 13 अप्रैल दिन शनिवार को सुबह दिन में 08:16 बजे तक अष्टमी तिथि होगी 13 अप्रैल दिन शनिवार को महानवमी का व्रत होगा क्योंकि 13 अप्रैल को सुबह 08:16 बजे के बाद ही नवमी तिथि लग जाएगी.

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इसलिए प्रतिपदा 6 अप्रैल 2019 को सूर्योदय 5 बजकर 47 मिनट से शुरू होगी. वहीं 12 अप्रैल 2019 दिन शुक्रवार को सुबह 10:18 बजे से 13 अप्रैल दिन शनिवार को सुबह दिन में 08:16 बजे तक अष्टमी तिथि होगी उसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी. 13 अप्रैल दिन शनिवार को महानवमी का व्रत होगा क्योंकि 13 अप्रैल को सुबह 08:16 बजे के बाद ही नवमी तिथि लग जाएगी जो 14 अप्रैल की सुबह 6 बजे तक ही विद्यमान रहेगी.

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नवमी तिथि में ही नवरात्र सम्बंधित हवन -पूजन 14 अप्रैल को प्रातः 06:00 बजे के पूर्व किसी भी समय किया जा सकता है. नवरात्र का पारण दशमी तिथि 14 अप्रैल दिन रविवार को प्रातः काल 6 बजे के बाद किया जाएगा. साथ ही 13 अप्रैल दिन शनिवार को मध्यान्ह नवमी तिथि होने के कारण प्रभु श्री राम की जयतीं यानी रामनवमी का पुण्य पर्व भी मनाया जाएगा.

ऐसे करें कन्‍या पूजन

सबसे पहले नौ कन्याओं को आदर से अपने घर बुलाकर शुद्ध पानी से उन सभी के पैरे धोकर उन्हें एक साथ बैठाएं. उनके तिलकर कर कलावा बांधकर उन्हें प्रेम से भोजन कराया जाता है और फिर उपहार में कोई वस्तु देकर उन्हें विदा किया जाता है.

First Published : 11 Apr 2019, 05:12:24 PM

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