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Devshayani Ekadashi 2024: आज देवशयनी एकादशी पर गलती से भी न करें ये काम, वरना विष्णु जी हो जाएंगे नाराज!

Devshayani Ekadashi 2024: देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु 4 मास के लिए क्षीरसागर में विश्राम करने चले जाते हैं और इस दौरान पूरे चातुर्मास में शुभ काम वर्जित हो जाते हैं. जानिए इस दौरान कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए.

Updated on: 17 Jul 2024, 09:14 AM

नई दिल्ली:

Devshayani Ekadashi 2024: हिन्दू धर्म में एकादशी के दिन को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसी आस्था है कि एकादशी के दिन शुभ इच्छा के साथ सभी काम करने चाहिए और व्रत-पूजा करनी चाहिए. पूरे साल भर में कुल 24 एकादशी होती है. लेकिन आषाढ़ मास में आने वाली एकादशी जिसे देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. ये एकादशी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है. इसी दिन भगवान विष्णु 4 मास के लिए क्षीरसागर में विश्राम करने चले जाते हैं और इस दौरान पूरे चातुर्मास में शुभ काम वर्जित हो जाते हैं. ऐसे में हम आपको कुछ ऐसे उपायों के बारे मे बताएंगे जिसे देवशयनी एकादशी के दिन ध्यान रखना चाहिए. 

1.  घी का दीपक 

इस साल देवशयनी एकादशी 17 जुलाई के दिन मनाई जाएगी. ऐसा कहा जाता है कि देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मीजी की पूजा जरूर करनी चाहिए और घी का दीपक अर्पित करना चाहिए. इससे घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है. 

2. न पहनें ये वस्त्र 

देवशयनी एकादशी का दिन बहुत शुभ होता है. ऐसे में इस दिन काले रंग के वस्त्र कभी नहीं पहनने चाहिए. काले वस्त्र नकारत्मक ऊर्जा को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. इसलिए अगर कोई व्यक्ति देवशयनी एकादशी के दिन काले वस्त्र धारण करता है तो चातुर्मास उसके लिए अशुभ साबित हो सकता है. इस दिन लाल, पीले या नारंगी रंग के वस्त्र पहनने चाहिए. 

3. शंख की स्थापना 

देवशयनी एकादशी के दिन घर में शंख की स्थापना करना बहुत अच्छा माना जाता है. इससे मां लक्ष्मी बहुत प्रसन्न होती हैं और अपनी असीम कृपा बरसाती हैं. शंख नाद आसपास के वातावरण को भी शुद्ध करता है और सकारात्मक ऊर्जा को स्थापित करता है. 

4. तुलसी और पीपल पूजा 

यूं तो तुलसी और पीपल के पेड़ काफी शुभ माने जाते हैं और इनकी पूजा करने से जीवन में सुख शांति आती है. लेकिन देवशयनी एकादशी के दिन ऐसा करना वर्जित माना जाता है. यहां तक कि इस दिन शाम की आरती के वक्त घंटी भी नहीं बजानी चाहिए. 

5. शुभ कार्य वर्जित 

देवशयनी एकादशी के दिन से चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है. ऐसे में कोई भी शुभ काम जैसे कि शादी, मुंडन, गृहप्रवेश आदि करना वर्जित होता है. ऐसा माना जाता है कि इस समय पर किया गया कोई भी शुभ कार्य फलदायी नहीं होता और नकारात्मक प्रभाव देता है.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. न्यूज नेशन इस बारे में किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)