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Daksh Ghat Haridwar( Photo Credit : News Nation)
Daksh Ghat Haridwar: दक्ष घाट हरिद्वार गंगा नदी के किनारे स्थित एक प्रमुख घाट है जो हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण स्थान है. यहाँ पर हजारों श्रद्धालुओं द्वारा स्नान किया जाता है और धार्मिक क्रियाएँ संपन्न की जाती हैं. दक्ष घाट का इतिहास महाभारत काल में गांधारी के पिता राजा दक्ष के नाम पर है. यहाँ पर संयुक्त रूप से श्री हरि का आराधना किया जाता है और लोग अपने पूर्वजों के आत्मा की शांति के लिए तर्पण करते हैं. इस घाट पर कई धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें पुण्याहवचन, पितृ पक्ष के श्राद्ध, और विवाह संस्कार शामिल हैं. यहाँ पर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय भी विशेष महत्व होता है और लोग इन समयों पर आकर्षित होते हैं. दक्ष घाट के पास एक छोटा मंदिर भी है, जो महाकाली मंदिर के रूप में जाना जाता है. समुद्र तट पर स्थित इस घाट पर प्राचीन स्तम्भों, मंदिरों, और धर्मशालाओं की सुंदर विशेषता है. यहाँ पर भारतीय संस्कृति के प्रतीक रात्रि पूजा और आरती की ध्वनि सुनी जा सकती है जो दर्शकों को आत्मा की शांति प्रदान करती है.
दक्ष प्रजापति मंदिर हरिद्वार, उत्तराखंड में गंगा नदी के पश्चिमी तट पर स्थित एक प्राचीन हिंदू मंदिर है. यह मंदिर भगवान दक्ष को समर्पित है, जो प्रजापति या सभी प्राणियों के पिता थे. ऐसा माना जाता है कि दक्ष ने यहां यज्ञ किया था और उनकी पत्नी सती ने उनके पिता के यज्ञ में खुद को आत्मदाह कर लिया था.
मंदिर का निर्माण 19वीं शताब्दी में महाराजा रणजीत सिंह ने करवाया था. यह मंदिर सफेद संगमरमर से बना है और इसमें नक्काशीदार मूर्तियां और जटिल नक्काशी है. मंदिर के गर्भगृह में भगवान दक्ष की शिवलिंग है. मंदिर परिसर में अन्य मंदिर भी हैं, जिनमें भगवान शिव, भगवान विष्णु और देवी सती को समर्पित मंदिर शामिल हैं.
दक्ष प्रजापति मंदिर हरिद्वार के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है. यह मंदिर पूरे साल भक्तों को आकर्षित करता है, लेकिन विशेष रूप से महाशिवरात्रि और श्रावण मास के दौरान. यहां दक्ष प्रजापति मंदिर, हरिद्वार की कुछ छवियां हैं
मंदिर का महत्व: दक्ष प्रजापति मंदिर कई कारणों से महत्वपूर्ण है. यह भगवान दक्ष को समर्पित एकमात्र मंदिर है, जो प्रजापति या सभी प्राणियों के पिता थे. ऐसा माना जाता है कि दक्ष ने यहां यज्ञ किया था और उनकी पत्नी सती ने उनके पिता के यज्ञ में खुद को आत्मदाह कर लिया था. मंदिर का निर्माण 19वीं शताब्दी में महाराजा रणजीत सिंह ने करवाया था. यह मंदिर सफेद संगमरमर से बना है और इसमें नक्काशीदार मूर्तियां और जटिल नक्काशी है. मंदिर हरिद्वार के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. न्यूज नेशन इस बारे में किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)
Source : News Nation Bureau
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