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Chinnamasta Jayanti 2024: देवी छिन्नमस्ता जयंती कब है, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथा और महत्व  

Chinnamasta Jayanti 2024: तंत्र-मंत्र विद्याओं से सिद्धि पाने के लिए देवी छिन्नमस्ता की पूजा की जाती है. 21 मई को छिन्नमस्ता जयंती है. हिंदू धर्म में इस दिन का क्या महत्व है और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है आइए जानते हैं.

Updated on: 20 May 2024, 10:39 AM

New Delhi :

Chinnamasta Jayanti 2024: देवी छिन्नमस्ता की पूजा से मोक्ष की प्राप्ति होती है. देवी छिन्नमस्ता शत्रुओं पर विजय दिलाती हैं. भय और रोगों से मुक्ति दिलाती हैं. देवी छिन्नमस्ता तंत्र शक्ति में वृद्धि करती हैं. छिन्नमस्ता जयंती देवी दुर्गा के दस महाविद्याओं में से छठी महाविद्या देवी छिन्नमस्ता का जन्मोत्सव है. यह जयंती हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है. इस साल छिन्नमस्ता जयंती 21 मई 2024 को मनाई जाएगी. देवी छिन्नमस्ता को देवी काली का एक रूप माना जाता है. इनका स्वरूप अत्यंत भयानक और वीर है. देवी छिन्नमस्ता अपने बाएं हाथ में अपना कटा हुआ सिर लिए हुए हैं और अपने दाहिने हाथ से खड्ग लिए हुए हैं. देवी के स्वरूप में रक्त की धारा बह रही है, जिसे दो योगिनियां ग्रहण कर रही हैं. छिन्नमस्ता जयंती के दिन भक्त देवी छिन्नमस्ता की पूजा करते हैं. मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है. भक्त देवी छिन्नमस्ता को फूल, माला, दूध, चावल, और फल अर्पित करते हैं. कुछ लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं.

शुभ मुहूर्त

प्रातः काल पूजा- 06:27 बजे से 08:11 बजे तक

अभिषेक का समय- 07:16 बजे से 08:11 बजे तक

दोपहर काल पूजा- 11:55 बजे से 01:40 बजे तक

शाम काल पूजा- 04:24 बजे से 07:09 बजे तक

देवी छिन्नमस्ता की पौराणिक कथा

एक बार, देवी काली और उनके अनुचर रणभूमि में राक्षसों से युद्ध कर रहे थे. युद्ध में देवी काली थक गईं और उन्हें प्यास लगी. उन्होंने अपने अनुचरों से पानी लाने के लिए कहा. लेकिन, सभी अनुचर युद्ध में व्यस्त थे. तभी, देवी काली ने अपने खड्ग से अपना सिर काट दिया और रक्त की धारा अपने मुख में भर ली. इस घटना से उनके अनुचर भयभीत हो गए और युद्ध छोड़कर भाग गए. देवी काली ने अपनी सहचरियों को आदेश दिया कि वे रणभूमि में बह रहे रक्त को इकट्ठा करें. उन्होंने रक्त को इकट्ठा करके एक खप्पर में भर लिया. इसके बाद, देवी काली ने अपना सिर वापस अपने धड़ पर लगा लिया और राक्षसों का वध जारी रखा.

छिन्नमस्ता जयंती का महत्व

छिन्नमस्ता जयंती मां दुर्गा की शक्ति और पराक्रम का प्रतीक है. यह त्योहार हमें सिखाता है कि हमें अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए. यह त्योहार हमें बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश भी देता है. छिन्नमस्ता जयंती के दिन लोग उनकी पूजा करते हैं. व्रत रखते हैं, भजन और कीर्तन करते हैं, दान-पुण्य करते हैं और गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करते हैं. आप भी छिन्नमस्ता जयंती के दिन इन कार्यों को करके इस त्योहार को मना सकते हैं.

छिन्नमस्ता मंत्र ॐ जयन्ती जया जयति चण्डी चामुण्डे स्वाहा॥

छिन्नमस्ता स्तोत्र जय जय रक्तवर्णा देवी जय जय कपालिनी॥

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. न्यूज नेशन इस बारे में किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)