News Nation Logo
Banner

चाणक्य नीति : इन लोगों से रहें दूर, वार्ना हो सकती है धन, समय और सम्मान की हानि

चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र के जरीए पाप-पुण्य, कर्तव्य और अधर्म-धर्म के बारें में बताया है इनकी नीतियों के जरीए व्यक्ति अपने जीवन को बेहतरीन बना सकता हैं.

News Nation Bureau | Edited By : Avinash Prabhakar | Updated on: 29 Apr 2021, 11:00:00 AM
cha

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: File)

दिल्ली :  

अगर किसी व्यक्ति को जीवन में सफल और सुखी रहना है तो उसे चाणक्य नीति को अपनाना चाहिए. आचार्य चाणक्य की नीतियां बेहद कठोर मानी जाती है लेकिन ये जीवन की सच्चाई होती है. चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र के जरीए पाप-पुण्य, कर्तव्य और अधर्म-धर्म के बारें में बताया है इनकी नीतियों के जरीए व्यक्ति अपने जीवन को बेहतरीन बना सकता हैं. आचार्य चाणक्य भारत के श्रेष्ठ विद्वानों में से एक माने जाते हैं. आचार्य चाणक्य की गिनती महान अर्थशास्त्री और श्रेष्ठ विद्वान को रूप में की जाती है. अर्थशास्त्र के ज्ञाता होने के कारण आचार्य चाणक्य को कौटिल्य भी कहा जाता है.

आचार्य चाणक्य अर्थशास्त्र के मर्मज्ञ माने जाते थे इसलिए उन्हें कौटिल्य भी कहा जाता था. इसके साथ ही चाणक्य राजनीति और कूटनीति में भी कुशल थे. नीतिशास्त्र में आचार्य चाणक्य ने मनुष्य के जीवन के पहलुओं को गहराई से स्पर्श किया है. यही कारण है कि चाणक्य की नीतियां आज के समय में भी प्रासंगिक हैं. आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में कुछ महत्वपूर्ण बातों के बारे में बताया है जिनको ध्यान में रखकर आप विपरीत परिस्थितियों को भी आसानी से पार कर लेते हैं. तो चलिए जानते हैं क्या कहती है चाणक्य नीति.

मूर्ख को उपदेश देना
चाणक्य नीति के अनुसार मूर्ख को उपदेश नहीं देना चाहिए। मूर्ख व्यक्ति को उपदेश देना बिलकुल व्यर्थ होता है वे सही बात को भी अपने कुतर्कों के आगे सही नहीं मानते हैं। जिससे ज्ञानी लोगों का बहुमूल्य समय नष्ट होता है, इसलिए व्यर्थ ही मूर्खों को उपदेश देने और उनके साथ रहने से बचना चाहिए।

ऐसे लोगों का न करना चाहिए भरण-पोषण
किस का भरण पोषण करना पुण्य का काम माना गया है लेकिन नीतिशास्त्र कहता है कि जो कर्कशा और चरित्रहीन है जो बुरे कर्मों में लिप्त है, ऐसे व्यक्ति का भरण पोषण नहीं करना चाहिए। ऐसे व्यक्तियों के साथ रहने और उनका भरण पोषण करने से अपयश मिलता है। आपके धन और सम्मान दोनों की हानि होती है।

बेकार में दुखी रहने वाले व्यक्ति 
कुछ लोग हर बात पर दुखी होते रहते हैं। सभी सुखों के होने पर भी अकारण ही दुख व्यक्त करते रहते हैं, उनसे दूरी बनाकर रखनी चाहिए। ऐसे लोगों के साथ रहने से मनुष्य में स्वयं भी नकारात्मक विचार आने लगते हैं। जिससे जीवन में बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे लोग स्वयं आगे नहीं बढ़ते हैं और न ही दूसरे को आगे बढ़ने देते हैं।

 

 

First Published : 29 Apr 2021, 11:00:00 AM

For all the Latest Religion News, Dharm News, Download News Nation Android and iOS Mobile Apps.