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Golden Hour: दिन के इस समय आप जो भी सोचते हैं वो आपके साथ होता है, जानें क्या है ये चमत्कारी टाइम

Golden Hour: क्या आप जानते हैं कि दिन में एक समय ऐसा आता है जिस वक्त आप जो सोचते हैं आपके साथ वैसा ही होता है. ये समय कौन सा है और कौन की दैव्य शक्तियां इस समय ब्रह्माण में होती हैं आइए जानते हैं.

Updated on: 13 Jun 2024, 09:49 AM

नई दिल्ली:

Golden Hour: सूर्योदय से ठीक 1 घंटा 36 मिनट पहले ब्रह्म मुहूर्त का समय शुरू होता है. इस समय को ब्रह्मांड की शक्तियों से भरा माना जाता है. यह समय ध्यान और वेदों के अध्ययन के लिए उत्तम माना गया है. 18 निमेश एक काष्टा के बराबर होती है. 30 काष्टाएं एक कला के बराबर होती हैं. 30 कलाओं का एक मुहूर्त होता है और 30 मुहूर्त के मेल से 1 दिन और रात बनता है. इस 30 मुहूर्त का सबसे चमत्कारिक मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त होता है, जिसे चमत्कारिक पल या फिर अमृत बेला माना गया है. सूर्योदय से ठीक 1 घंटा 36 मिनट पहले का वो रहस्यमय और चमत्कारिक समय अगर आपने इस्तेमाल करना सीख लिया तो कुछ ही समय में अपने जीवन में आए ऐसे ऐसे बदलाव को देखेंगे जिसे देख आप खुद दंग हो जाओगे. मनु स्मृति में महार्षि मनु ने भी कहा है कि ब्रह्म मुहूर्त में उठकर हमें ध्यान और वेदों का अध्ययन करना चाहिए. पूरा दिन और रात मिलाकर 30 मुहूर्त होते हैं और सभी मुहूर्त 48 मिनट तक चलते हैं. सूर्योदय के ठीक पहले दो मुहूर्त होते हैं ब्रह्म मुहूर्त उसके बाद समुद्रमुहूर्त. ब्रह्म मुहूर्त यानि कि ब्रह्मांड का समय या फिर ब्रह्मा का समय, इस समय पूरे युनिवर्स में ऐसी रहस्यमय और चमत्कारिक शक्ति फैली होती है जिसे आप अपने तरीके से यूज़ कर अपनी हर इच्छा को पूरा कर सकते हैं. अब हम जानते हैं कि ऐसा कौन सी चीज़ है जो 30 मुहूर्तों में से ब्रह्म मुहूर्त को इतना शक्तिशाली बनाती है. 

पावरफुल एनर्जी

हमारे बॉडी में टोटल 72,000 नाडिया होती है और सीप सविता में ये नंबर बढ़कर साढ़े 3,00,000 नाड़ियों की बात होती है. पर इसमें से सबसे इम्पोर्टेन्ट नाडिया पिंगला और सुषमा, नाडिया और एक सामान्य मनुष्य में सिर्फ इड़ा नाड़ी और पिंगला नाड़ी अक्टिवेट होती है. सबसे पहले आप अपनी ऊंगली लेकर अपने नाक के नीचे रखिए और इस नॉनस्ट्रिल से आप सांस ज्यादा छोड़ रहे हैं. 99% से भी ज्यादा लोग अपने किसी एक से सांस ज्यादा छोड़ रहे हैं. या तो लेफ्ट या तो राइट. बहुत कम टाइम ऐसा होता जिसमें आपका दोनों नॉस्ट्रिल अक्टिवेट होते हैं. लेकिन ब्रह्म मुहूर्त के दौरान आपके दोनों इड़ा और पिंगला तोड़ो नाड़ी अक्टिवेट हो जाती और ये हमारे कुंडलीनी शक्ति को जागृत करने के लिए इम्पोर्टेन्ट रोल प्ले करती हैं. और जब आप ब्रह्म मुहूर्त में मेडिटेशन यानी कि ध्यान करते हैं तो आपका सुषमा नारी भी अक्टिवेट हो जाती है और ये हमारे मूलाधार चक्र से होते हुए सहस्त्र चक्र तक पहना स्टार्ट कर देती है. इसलिए साधु और योगी ब्रह्म मुहूर्त में उठ कर ध्यान करते हैं. 

जैविक लय (Circadian Rhythms)

सर्कैडियन रिदम हमारे लिए पूरे पृथ्वी और हमारा शरीर पंच महाभुत के मेल से बने आकाश, वायु, जल, अग्नि और पृथ्वी. इन्हीं पांच तत्वों के मेल से हमारे बॉडी के तीन मुख्य दोषों का निर्माण होता हैं, जिसे त्रिदोष भी कहते हैं. वात, पित और कफ और इन दोषों में सबसे इम्पोर्टेन्ट दोष हैं वात दोष. हमारे बॉडी में अगर वात दोष असंतुलित हो जाता हैं तो हम किसी काम में कॉन्सेंट्रेटेड या फिर फोकस नहीं कर पाते. हमें एन्क्साइटी, डर या अकेलापन महसूस होता हैं. आयुर्वेदा के अनुसार, हमारे बॉडी में सुबह दो बजे से लेकर छह बजे तक वात दोष का लेवल सबसे ज्यादा होती हैं. इसलिए इस समय हमारे क्रियेटिविटी, कॉन्सेन्ट्रेशन और फोकस करने की क्षमता सबसे ज्यादा होती हैं. इसलिए हमें इस समय पर ज्यादा से ज्यादा क्रियेटिव वर्क करना चाहिए और इससे हमारा ये दोष भी बैलेंस होने लगता है.

आकर्षण का नियम (Law of Attraction)

जिस तरह से हम और हमारा ब्रेन एक दूसरे से इंटर कनेक्टेड हैं. उसी तरह से हम और ब्रह्मांड एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. अगर आप प्राकृतिक के नियम के अकॉर्डिंग चलोगे ये ब्रह्मांड आपको वो हर एक चीज़ देगी जो आप चाहोगे. अगर आप ब्रह्म मुहूर्त के समय अपने कोई भी विचार ब्रह्मांड को दोगे तो ये ब्रह्मांड उस थॉट को रियल लाइफ में मैनिफेस्ट करने में उतना ही कम समय लेंगे. इसके अलावा भी बहुत सारी चीज़े हैं जो इस अड़तालीस मिनट के मुहूर्त को और ज्यादा पावरफुल बनाती हैं. जैसे कॉस्मिक एनर्जी, आपको पता है कि हमारी रातें चार कालों में विभाजित होती है. उदाहरण के लिए-

अगर सूर्यास्त 6:00 बजे होता है तो छह से नौ रुद्रकाल इस समय में कभी भी सोना नहीं चाहिए. 

09:00 से 12:00 राक्षस काल इस समय में कभी भी जगे हुए नहीं रहना चाहिए.

रात 12:00 से 03:00 गंधर्व काल जब हम सबसे गहरी नींद में होते हैं. 

देर रात 03:00 से 06:00 मनोहर काल जिस समय हमें हर हालत में बिस्तर छोड़ देना चाहिए क्योंकि मनोहर काल के दौरान सबसे ज्यादा कॉस्मिक एनर्जी यानि विश्व शक्ति होती है और ये वो ही एनर्जी है जो इस ब्रह्माण को सुचारु रूप से चलने में मदद करती है. लेकिन जब हम सोए होते हैं तब हमारे बॉडी में बहुत कम मात्रा में कॉस्मिक एनर्जी एंटर कर पाती हैं.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. न्यूज नेशन इस बारे में किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)