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Chhath Puja 2017: पूजन विधि, पौराणिक कथा के साथ जाने पर्व का महत्व

दीवाली के छह दिन बाद मनाया जाने वाला लोकपर्व आज महापर्व का रूप ले चुका है। देश के साथ विदेश में भी इस त्योहार को धूमधाम से मनाया जाता है।

News Nation Bureau | Edited By : Sunita Mishra | Updated on: 24 Oct 2017, 05:10:15 PM
छठ पूजा 2017: पूजन विधि, पौराणिक कथा और पर्व का महत्व

नई दिल्ली:  

भारत विविधताओं का देश है, यहां हर त्योहार को मनाने का अपना अलग ही अंदाज है। होली, रक्षाबंधन, दशहरा, दिवाली, भाईदूज, गुरु पर्व और ईद का जश्न यहां बहेद जोर-शोर से मनाया जाता है।

दीवाली के छह दिन बाद मनाया जाने वाला लोकपर्व आज महापर्व का रूप ले चुका है। देश के साथ विदेश में भी इस त्योहार को धूमधाम से मनाया जाता है। आइए आपको बताते हैं छठ पर्व का महत्व, पूजा विधि और इस पर्व के पीछे छिपी पौराणिक कथा।

बिहार व पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाये जाने वाले छठ पूजा का अपना विशेष महत्व है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह भारत के सूर्यवंशी राजाओं के मुख्य पर्वों से एक माना जाता था। कहा जाता है कि एक समय मगध सम्राट जरासंध के एक पूर्वज का कुष्ठ रोग हो गया था।

इस रोग से निजात पाने के लिए राज्य के शाकलद्वीपीय मग ब्राह्मणों ने सूर्य देव की उपासना की थी। फलस्वरूप राजा के पूर्वज को कुष्ठ रोग से छुटकारा मिला और तभी से छठ पर सूर्योपासना की प्रातः आरंभ हुई है।

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छठ व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसे पूर्ण नियम और निष्ठा के साथ किया जाता है। इसे करने से घर में लक्ष्मी आती है और जीवन सुखमय होता है।

छठ व्रत की पूजा विधि

छठ पर्व से दो दिन पूर्व चतुर्थी पर स्नानादि से निवृत्त होकर भोजन किया जाता है। पंचमी को उपवास करके संध्याकाल में किसी तालाब या नदी में स्नान करके सूर्य भगवान को अर्ध्य दिया जाता है। तत्पश्चात पारण किया जाता है।

निम्न मन्त्रों का करें उच्चारण
ऊं अद्य अमुकगोत्रोअमुकनामाहं मम सर्व
पापनक्षयपूर्वकशरीरारोग्यार्थ श्री
सूर्यनारायणदेवप्रसन्नार्थ श्री सूर्यषष्ठीव्रत करिष्ये।

पूरा दिन निर्जला रहकर पुनः नदी या तालाब पर जाकर स्नान किया जाता है और सूर्यदेव को अर्ध्य दिया जाता है। अर्ध्य देने की भी एक विधि होती है। एक बांस के सूप में केला एवं अन्य फल, अलोना प्रसाद, ईख आदि रखकर उसे पीले वस्त्र से ढक दें। तत्पश्चात दीप जलाकर सूप में रखें और सूप को दोनों हाथों में लेकर निम्न मन्त्र का उच्चारण करते हुए तीन बार अस्त होते हुए सूर्यदेव को अर्ध्य दें।

ऊं एहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पया मां भवत्या गृहाणार्ध्य नमोअस्तुते॥

छठ पूजा 2017 शुभ मुहूर्त

छठ पर्व तिथि- 26 अक्तूबर 2017, बृहस्पतिवार
छठ तिथि को सूर्योदय का समय- प्रातः काल 06:28 (26 अक्तूबर 2017)

सूर्यास्त, छठ तिथि

सांय काल: 05:40 (26 अक्तूबर 2017)

षष्ठी तिथि प्रारंभ- प्रात: 09:37 बजे से (25 अक्तूबर 2017)

षष्ठी तिथि समाप्त - दोपहर 12:15 बजे तक (26 अक्तूबर 2017)

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First Published : 24 Oct 2017, 04:48:57 PM

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