Bhanu Saptami 2026: आज भानु सप्तमी पर सूर्यदेव को जल चढ़ाते समय बोले ये एक मंत्र, सुखों से भर जाएगा जीवन

Bhanu Saptami 2026: हिंदू धर्म में सूर्यदेव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है क्योंकि वे रोज सभी को प्रकाश देते हैं. पंचांग के अनुसार, आज यानी 8 फरवरी को भानु सप्तमी मनाई जा रही है. यह दिन सूर्यदेव की पूजा और उपासना के लिए बेहद शुभ है.

Bhanu Saptami 2026: हिंदू धर्म में सूर्यदेव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है क्योंकि वे रोज सभी को प्रकाश देते हैं. पंचांग के अनुसार, आज यानी 8 फरवरी को भानु सप्तमी मनाई जा रही है. यह दिन सूर्यदेव की पूजा और उपासना के लिए बेहद शुभ है.

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Akansha Thakur
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Bhanu Saptami 2026

Bhanu Saptami 2026

Bhanu Saptami 2026:सनातन घर्म में सूर्य भगवान का विशेष महत्व होता है. माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को भानु सप्तमी मनाई जाती है. इसे रथ सप्तमी, सूर्य जयंती और माघ सप्तमी जैसे नामों से जाना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से सूर्यदेव की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और सौभाग्य में वृद्धि होती है. रविवार का दिन होने के कारण इस बार की सप्तमी का महत्व और भी बढ़ गया है. 

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भानु सप्तमी पर ऐसे करें पूजा 

अगर आप भानु सप्तमी पर व्रत कर रहे हैं तो सुबह उठते ही सबसे पहले स्नान करें फिर साफ और हल्के या पीले रंग के कपड़े पहनें. तांबे के लोटे में जल भरें और उसमें लाल फूल, अक्षत और रोली डालें. उगते सूर्य को जल अर्पित करें. सूर्यदेव के मंत्रों का जाप करें और उनका ध्यान करें. पूजा के बाद जरूरतमंद लोगों को दान देना शुभ माना जाता है. 

सूर्यदेव को अर्घ्य देते समय बोले यह मंत्र 

धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्यदेव को अर्घ्य देते समय इस मंत्र का जापप करना बेहद फलदायी माना जाता है. ॐ घृणि सूर्याय नमः इस मंत्र के जाप से सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति के जीवन से नकारात्मक ऊर्जा दूर होने लगती है. 

भानु सप्तमी पर करें ये उपाय 

इस दिन गुड़े, गेहूं और लाल वस्त्र का दान करना सबसे शुभ माना जाता है. 
सूर्यदेव को लाल फूल और जल अर्पित करें. 
गरीब और जरूरतमंद लोगों की सहायता करें. 
मान्यता है कि सूर्य नमस्कार करने से भी विशेष लाभ मिलता है. 

भानु सप्तमी का महत्व 

माघ शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को भानु सप्तमी मनाई जाती है. इसे सूर्यदेव के जन्म दिवस के रूप में भी मनाया जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार,  इसी दिन सूर्यदेव अपने सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर संसार को प्रकाश देने निकले थे. धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि इस दिन सूर्यदेव की पूजा करने से व्यक्ति को रोगों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सफलता के नए रास्ते खुलते हैं. 

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