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Amalaki Ekadashi 2026 Vrat Katha
Amalaki Ekadashi 2026 Vrat Katha: सनातन धर्म में एकादशी का विशेष महत्व होता है. हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन आमलकी एकादशी रखा जाता है. आज यानी 27 फरवरी 2026 को ये व्रत रखा जा रहा है. इसे आंवला एकादशी या रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है. मान्यता है कि इसी दिन काशी में रंगभरी एकादशी मनाई जाती है. आमलकी एकादशी के दिन श्रीहरि विष्णु का व्रत और विधि-विधान से पूजन किया जाता है. इस दिन आंवले के पेड़ की भी पूजा की जाती है. इस दिन पूजा के समय आमलकी एकादशी व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए. आइए पढ़ते हैं आमलकी एकादशी व्रत की कथा.
आमलकी एकादशी की व्रत कथा (Amalaki Ekadashi 2026 Vrat Katha)
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार की बात है जब वैदिक नामक नगर में चंद्रवंशी राजा का शासन हुआ करता था. इस नगर के लोग भगवान विष्णु की भक्ति और पूजन किया करते थे. हर एकादशी का व्रत विधि-विधान से किया जाता था. फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष में आमलकी एकादशी का व्रत बड़े श्रद्धा के साथ किया जाता था. इसी दौरान नगर में एक महापापी शिकारी पहुंच गया. वह शिकार नगर में रुका और भगवान विष्णु की कथाएं सुनने लगा.
शिकारी ने सुनी आमलकी एकादशी की कथा
इसके बाद शिकारी ने पूरी कथा सुनने के बाद वहां के लोगों से व्रत का महत्व को समझा. इसके बाद वह अपने घर आ गया. कुछ ही दिनों बाद वो मर गया. अपने पापों के वजह से उस शिकारी को नरक प्राप्त हुआ लेकिन उसने एक बार अनजाने में आमलकी एकादशी व्रत कथा सुनी और जागरण भी किया तो इस कारण उसे व्रत का शुभ फल प्राप्त हुआ.
राजा विदूरथ के घर हुआ पुनर्जन्म
उसका जन्म फिर राजा विदूरथ के घर हुआ और उसका नाम वसुरथ रखा गया. वसुरथ बड़ा होकर एक दिन जंगल में भटक गया. तभी अचानक कुछ डाकुओं ने उस पर हमला कर दिया लेकिन उस पर हमले का कोई असर नहीं पड़ा. इधर राजा निश्चिंत होकर सोते रहे. राजा की नींद खुली तो उसने अपने आसपास कई लोगों को जमीन पर गिरा पड़ा हुआ देखा. तभी आकाशवाणी हुई और कहा कि तुझे जगत पालनहार भगवान विष्णु ने बचाया है. क्योंकि पिछले जन्म में तुमने आमलकी एकादशी व्रत रखा था और कथा सुनी थी.
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