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Navratri 2017: मां दुर्गा के 9 शस्त्रों का ये है रोचक रहस्य

21 सितंबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो गई है। दुर्गा सप्तशती के मुताबिक, देवताओं ने देवी को अपने हथियार प्रदान किए थे, ताकि वह असुरों के साथ होने वाले महासंग्राम में युद्ध में विजयी रहें। मां दुर्गा के हाथों में नौ अस्त्र-शस्त्र हैं। आइए जानते हैं कि शत्रुओं को पराजित करने के लिए माता ने किस शस्त्र का इस्तेमाल किया था।

News Nation Bureau | Updated : 21 September 2017, 02:38:37 PM
21 सितंबर से शुरू हो गए हैं शारदीय नवरात्रि (फाइल फोटो)

21 सितंबर से शुरू हो गए हैं शारदीय नवरात्रि (फाइल फोटो)

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21 सितंबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो गई है। दुर्गा सप्तशती के मुताबिक, देवताओं ने देवी को अपने हथियार प्रदान किए थे, ताकि वह असुरों के साथ होने वाले महासंग्राम में युद्ध में विजयी रहें। मां दुर्गा के हाथों में नौ अस्त्र-शस्त्र हैं। आइए जानते हैं कि शत्रुओं को पराजित करने के लिए माता ने किस शस्त्र का इस्तेमाल किया था।
भक्त 9 दिनों तक माता का व्रत रखते हैं (फाइल फोटो)

भक्त 9 दिनों तक माता का व्रत रखते हैं (फाइल फोटो)

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त्रिशुल भगवान शंकर ने दैत्यों से युद्ध के लिए अपने शूल से त्रिशूल निकालकर मां दुर्गा को भेंट किया था। इससे देवी को महिषासुर समेत असुरों का वध करने में सहायता मिली थी।
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शंख वरुण देव ने माता को शंख भेट किया था। इस शंख की ध्वनि जब गुंजायमान होती है तो धरती, आकाश और पाताल में दैत्यों की सेना भाग खड़ी होती है।
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चक्र भगवान विष्णु ने भक्तों की रक्षा करने के लिए देवी को चक्र अर्पण किया था। यह चक्र उन्होंने खुद अपने चक्र से उत्पन्न किया था।
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धनुष-बाण पवन देव ने देवी को धनुष और बाणों से भरा तरकश प्रदान किया था। मां ने धनुष और बाणों के प्रहार से असुरों की सेना को नष्ट कर दिया था।
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वज्र देवराज इंद्र ने अपने वज्र से दूसरा वज्र उत्पन्न कर माता को भेंट किया था। वज्र के प्रहार से सेना युद्ध के मैदान से भाग खड़ी हुई थी।
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घंटा देवराज इंद्र ने ऐरावत हाथी के गले से एक घंटा उतारकर भी माता को भेंट किया था। असुर घंटे की भयंकर ध्वनि से मूर्छित हो गए थे और फिर उनका संहार हुआ था।
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दंड यमराज ने माता को दंड भेंट किया था। देवी ने युद्ध भूमि में दैत्यों को दंड पाश से बांधकर धरती पर घसीटा था।
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फरसा विश्वकर्मा देव ने देवी को फरसा प्रदान किया था। चंड-मुंड का सर्वनाश करने वाली देवी ने काली का रूप धारण कर हाथों में तलवार और फरसा लेकर असुरों से युद्ध किया था।
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तलवार यमराज ने देवी को तलवार और ढाल भेंट की थी। देवी ने असुरों की गर्दन तलवार से ही काटी थी।