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Independence Day 2020: आजादी के लिए देश को चुकानी पड़ी ये बड़ी कीमत, देखें तस्वीरें

1947 में भले ही भारत को आजादी मिल गई लेकिन इसकी कीमत करोड़ों लोगों को अपने करीबियों से दूर होकर चुकानी पड़ी.

News Nation Bureau | Updated : 14 August 2020, 02:49:57 PM
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भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद भारत जाते सिख

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1947 में भले ही भारत को आजादी मिल गई लेकिन इसकी कीमत करोड़ों लोगों को अपने करीबियों से दूर होकर चुकानी पड़ी. 

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महात्मा गांधी और मौहम्मद अली जिन्ना

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भारत के विभाजन के ढांचे को '3 जून प्लान' या माउण्टबैटन योजना का नाम दिया गया.  भारत और पाकिस्तान के बीच की सीमारेखा लंदन के वकील सर सिरिल रैडक्लिफ ने तय की. हिन्दू बहुमत वाले इलाके भारत में और मुस्लिम बहुमत वाले इलाके पाकिस्तान में शामिल किए गए.

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विभाजन के बाद अपने-अपने देश जाते लोग

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18 जुलाई 1947 को ब्रिटिश संसद ने भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम पारित किया जिसमें विभाजन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया.  इस समय ब्रिटिश भारत में बहुत से राज्य थे जिनके राजाओं के साथ ब्रिटिश सरकार ने तरह-तरह के समझौते कर रखे थे.  इन 565 राज्यों को आज़ादी दी गयी कि वे चुनें कि वे भारत या पाकिस्तान किस में शामिल होना चाहेंगे. अधिकतर राज्यों ने बहुमत धर्म के आधार पर देश चुना.

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जवाहर लाल नेहरू और मोहम्मद अली जिन्ना

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जिन राज्यों के शासकों ने बहुमत धर्म के अनुकूल देश चुना उनके एकीकरण में काफ़ी विवाद हुआ. विभाजन के बाद पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र में नए सदस्य के रूप में शामिल किया गया और भारत ने ब्रिटिश भारत की कुर्सी संभाली

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विभाजन के बाद अपने-अपने देश जाते लोग

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भारत का विभाजन माउंटबेटन योजना के आधार पर निर्मित भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के आधार पर किया गया. इस अधिनियम में काहा गया कि 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान अधिराज्य नामक दो स्वायत्त्योपनिवेश बना दिए जाएंगें और उनको ब्रिटिश सरकार सत्ता सौंप देगी.