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Durga Puja 2017: 'सिन्दूर खेला' के साथ पूरी हुई मां की विदाई , देखिये तस्वीरें

Durga Puja 2017 Beautiful photos of Sindoor Khela celebrations across the country Kolkata

News Nation Bureau | Updated : 30 September 2017, 11:38:24 PM
(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

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आज दुर्गा पूजा और दशहरा का जश्न मनाया जा रहा है। दुर्गा पूजा के पंडालों में 'सिंदूर खेला' की धूम है। मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन करने से ठीक पहले 'सिंदूर खेला' की परंपरा है।
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‘सिंदूर खेला’ की पंरपरा को हर साल देवी की विदाई के वक्त पूरी की जाती है। इसे सिंदूर की होली भी कहा जाता है। पारंपरिक सफेद-लाल साड़ी में महिलाएं इसे मनाती हैं। यही वजह है कि पूजा के आखिरी लम्हें लोगों के दिलों में सालभर के लिए कैद हो जाते हैं। जैसा कि इस बार भी हुआ। श्रद्धालु इस दिन का सालभर इंतजार करते हैं।
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सिंदूर खेला की सबसे ज्यादा रौनक अगर कहीं दिखती है तो वह पश्चिम बंगाल ही है। मूल रूप से इस त्योहार को बंगाली समुदाय ही मनाता रहा है। विवाहित महिलाएं लाल और सफेद साड़ियां पहनकर परंपरागत विधि-विधान से 'सिंदूर खेला' निभाते हुए एक-दूसरे को लाल सिंदूर लगाती हैं। ऐसा करके वह देवी दुर्गा को विदा करती हैं।
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(फोटो: पीटीआई)

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दुर्गा पूजा के दौरान देवी की आराधना, चंडी पाठ के बाद आखिरी दिन मां दुर्गा को मिठाई, पान आदि सामग्रियों की भेंट चढ़ाकर मां से अगले साल दोबारा आने की कामना की जाती है। भक्त देवी से घर, समाज में खुशहाली की दुआ भी मांगते हैं।
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ऐसी मान्यता है कि जिस प्रकार पूर्ण श्रृंगार कर बेटी को विदा किया जाता है उसी प्रकार मां दुर्गा को भी ससुराल विदा किया जाता है। जिसके बाद वह शिवजी के पास चली जाती हैं। इस दौरान मां की गोद भराई कर पान व मिठाई खिलाने की भी परंपरा है। इसके बाद सुहागिन महिलाएं मां को सिंदूर लगाती हैं।
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बंगाली समुदाय की विवाहित महिलाएं प्रतिमा विसर्जन से पूर्व पंडाल जाकर मां का सिंदूर एक-दूसरे को लगाकर सुहागिन रहने की कामना करती हैं।
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(फोटो: पीटीआई)

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सिंदूर खेला के बाद पंडाल से प्रतिमाएं निकालकर विसर्जन हेतु ले जाया जाता है। इस दौरान उत्साही युवक नृत्य भी करते हैं।
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