करुणानिधि
तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि का फिल्मी और साहित्य की दुनिया का सफर भी राजनीति की तरह शानदार रहा है। पचास के दशक में फिल्मों में कदम रखने वाले करुणानिधि सफल राजनेता, मुख्यमंत्री, फिल्म लेखक, साहित्यकार, पत्रकार, प्रकाशक और कार्टूनिस्ट भी रहे हैं।
एमजीआर के साथ करुणानिधि
साल 1947 में उन्होंने ज्यूपिटर्स फिल्म के साथ 'राजाकुमारी' की कहानी लिखी थी। जिसके लिए उन्होंने काफी सराहना भी पाई। इसी फिल्म तमिल सिनेमा के महान नायक एमजीआर ने बतौर नायक अपने करियर की शुरूआत की थी।
कला का विद्वान कहे जाते थे करुणानिधि
लेखक और स्क्रिप्टराइटर समाजवादी और बुद्धिवादी आदर्शों को बढ़ावा देने वाली ऐतिहासिक और सामाजिक (सुधारवादी) कहानियां लिखने के लिए जाने जाते थे। इसलिए तमिल सिनेमा में उन्हे कला का विद्वान कहा जाता था।
करुणानिधि को 'कलईगनर' की उपाधि
'तुक्कु मेडइ' नाटक के महान एक्टर एम. आर. राधा ने करुणानिधि को 'कलईगनर' की उपाधि दी थी। करुणानिधि ने ही ये नाटक लिखा था।
करुणानिधि
64 साल के करियर में 69 फिल्में करने वाले करुणानिधि सिर्फ सिनेमा ही नहीं साहित्य में भी काफी रुचि रखते थे। उनके घर में करीब 10 हजार से ज्यादा किताबे है।
करुणानिधि
करुणानिधि ने ज्यादातर विधवा पुनर्विवाह, छुआछूत, जमींदारी का खात्मा, धर्म के नाम पर अंधविश्वास जैसे सामाजिक मुद्दो पर कहानी लिखी। इस तरह के संदेशों वाली करुणानिधि की दो अन्य फ़िल्में पनाम और थंगारथनम थीं।
करुणानिधि
तमिल सिनेमा में करुणानिधि के योगदाने के अलावा उन्होंने 150 से ज्यादा किताबें औऱ उपन्यास लिखे है। उन्होंने करीब 21 नाटक भी लिखे है।
साहित्य प्रेमी करुणानिधि
उन्होनें मनिमागुडम, ओरे रदम, पालानीअप्पन, तुक्कु मेडइ, कागिदप्पू, नाने एरिवाली, वेल्लिक्किलमई, उद्यासूरियन और सिलप्पदिकारम जैसे नाटक और रोमपुरी पांडियन, तेनपांडि सिंगम, वेल्लीकिलमई, नेंजुकू नीदि, इनियावई इरुपद, संग तमिल, कुरालोवियम, पोन्नर शंकर, तिरुक्कुरल उरई आदि किताबें लिखी।