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लोकसभा चुनाव

CAA के क्यों खिलाफ हैं ममता बनर्जी? ये है विरोध के पीछे की असली वजह

Mamata Banerjee On CAA: नागरिकता संशोधन कानून ( CAA ) बनने से लेकर लागू होने तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का लगातार विरोध कर रही हैं, जानें क्यों?

Updated on: 15 Mar 2024, 06:21 PM

New Delhi:

Mamata Banerjee On CAA: नागरिकता संशोधन कानून अब पूरे देश में लागू हो चुका है. 11 मार्च को नोटिफिकेशन जारी होते ही देशभर में यह कानून अमल में आ गया था. देशभर में सीएए कानून को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. कई राज्यों में सीएए के आने से खुशी का माहौल है तो पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में इसका पुरजोर विरोध हो रहा है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चेतावनी दी है कि वह सीएए को अपने राज्य में हर्गिज लागू नहीं होने देंगी. हालांकि संसद से पास होने के बाद कोई राज्य इस कानून को अपने यहां लागू करने से मना नहीं कर सकता. ऐसे में हमें यह समझने की जरूरत है कि ममता बनर्जी की आखिर क्यों सीएए का विरोध कर रही हैं.

बंगाल में मतुआ समुदाय को लेकर चिंतित ममता बनर्जी

दरअसल, ममता बनर्जी की चिंता राज्य के दक्षिणी क्षेत्र के नादिया जिले के मतुआ समुदाय को लेकर है. यह समुदाय चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. मूलरूप से शरणार्थी यह समुदाय पाकिस्तान-बांग्लादेश विभाजन के समय बंगाल में आया था. भारी संख्या में होने के बावजूद मतुआ समुदाय के इन लोगों को आज तक भारत की नागरिकता नहीं मिल सकी है. इस समुदाय के लोग सालों से भारत सरकार से नागरिकता की मांग कर रहे थे. इस क्रम में उन्होंने कई बार आंदोलनों का भी सहारा लिया,  लेकिन नागरिकता को लेकर उनकी मांग बस मांग ही बनकर रह गई. अब जबकि मोदी सरकार ने पूरे देश में सीएए लागू कर दिया है तो उनको भारत की नागरिकता मिलनी तय है. मतुआ समुदाय की आबादी राज्य के उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, पश्चिमी बर्धमान, कूचबिहार, नादिया और जलपाईगुड़ी में सबसे ज्यादा है.

कई सीटों पर ममता बनर्जी को हो सकता है नुकसान

तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी की चिंता है कि नागरिकता संशोधन कानून का मतुआ समुदाय पर सीधा प्रभाव पड़ेगा और वो चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को वोट देगा. इसकी वजह से टीएमसी को राज्य की कम से कम पांच सीटों पर सीधा नुकसान उठाना पड़ सकता है. क्योंकि कई क्षेत्रों में तो मतुआ समुदाय की आबादी 80 प्रतिशत तक है और 2019 के विधानसभा चुनाव में मतुआ समुदाय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. तब तृणमूल कांग्रेस को राज्य की लगभग 12 सीटों पर नुकसान उठाना पड़ा था. जबकि बीजेपी को इन सीटों पर काफी बढ़त मिली थी. ऐसे में ममता बनर्जी को चिंता है कि लोकसभा चुनाव में भी अगर इस फैक्टर ने काम किया तो उनकी पार्टी 5 से 6 सीटों पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है. एक रिकॉर्ड के अनुसार बंगाल के जलपाईगुड़ी, कूच बिहार और बालुरघाट जैसे क्षेत्रों में हिंदू शरणार्थियों की संख्या लगभग 40 लाख है. पिछले चुनाव में भी बीजेपी ने इस सीटों पर बाजी मार ली थी.