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तीस हजारी हिंसा : इंसाफ मांगते पुलिसकर्मी और यूं बयां होने लगा आम आदमी का दर्द

तीस हजारी कोर्ट में पुलिस और वकीलों के बीच हुए विवाद के बाद मंगलवार को दिल्ली पुलिस के कर्मचारियों ने पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. इस मौके पर कई पुलिस वालों के हाथ में तख्तियां देखने को मिलीं.

By : Yogendra Mishra | Updated on: 05 Nov 2019, 02:48:26 PM
तीस हजारी कोर्ट में मारपीट के विरोध में धरने पर बैठे पुलिस कर्मी।

तीस हजारी कोर्ट में मारपीट के विरोध में धरने पर बैठे पुलिस कर्मी। (Photo Credit: PTI)

नई दिल्ली:

तीस हजारी कोर्ट (Tis Hazari Violence) में पुलिस और वकीलों के बीच हुए विवाद के बाद मंगलवार को दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के कर्मचारियों ने पुलिस मुख्यालय (Delhi Police Headquarters) के बाहर प्रदर्शन किया. इस मौके पर कई पुलिस (Police) वालों के हाथ में तख्तियां देखने को मिलीं. जिसमें पुलिस की मदद के स्लोगन लिखे हुए थे. उनमें लिखे हुए थे कि हमें भी इंसान समझा जाए. ट्विटर पर कई पुलिस अधिकारियों ने भी अपना रोष जाहिर किया है. उनका कहना है कि पुलिस वालों को इंसान नहीं समझा जाता है. तीस हजारी कोर्ट में हुए इस मामले में पुलिस का कहना है कि एक वकील की तरफ से विवाद की शुरुआत की गई.

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वहीं वकीलों का कहना है कि पुलिस ने वर्दी का रौब दिखाया जिसके बाद मारपीट शुरु हुई. इस मामले से जुड़े कई वीडियो ट्विटर पर देखने को मिल रहे हैं. जिसमें पुलिस वालों पर वकील हमला कर रहे हैं. चाहे पुलिस के द्वारा वकील पर की गई हिंसा हो या फिर वकील के द्वारा पुलिस पर हुई हिंसा, ये दोनों ही गलत हैं.

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लेकिन आज खुद के लिए न्याय मांग रही पुलिस आम जनता से किस तरह व्यवहार करती है उसके बारे में हर कोई जानता है. भगत सिंह के जीवन पर बनी फिल्म 'द लेजेंड ऑफ भगत सिंह' में अंग्रेजों की पुलिस जैसा अजय देवगन के साथ व्यवहार कर रही होती है. कई बार वैसा ही व्यवहार इस देश की पुलिस आम आदमी के साथ करती है.

सिद्धार्थनगर में युवक को पीटती पुलिस।

इसके पीछे का कारण सीधे तौर पर वह वर्दी मानी जाती है जिसे पहनते ही एक आम इंसान खास इंसान बन जाता है. जिसे पहनने के बाद किसी भी आदमी में एक अलग तरह का रौब आ जाता है. उसे यह लगनने लगता है कि उसके हाथ का डंडा और कंधे पर लगे सितारे उसे कुछ भी करने का अधिकार दे देते हैं.

बिहार में हेलमेट न लगाने को लेकर शुरु हुआ विवाद।

आज हम आपको कुछ ऐसी ही घटनाओं की याद दिलाना चाहते हैं जब पुलिस वाले एक आम नागरिक को इंसान नहीं समझ रहे होते हैं. उसे जानवरों की तरह मारते हैं. सितंबर में उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले से एक वीडियो सामने आया. जिसमें दो पुलिस वाले एक शख्स को लात घूसों से पीट रहे हैं. बगल में ही उसका एक छोटा बच्चा यह सब खड़ा देख रहा है.

रांची के कांटाटोली में ट्रैफिक पुलिस वाले ने एक आम आदमी की कॉलर को ही पकड़ लिया।

आप ही सोचिए कि उस बच्चे के दिमाग में खाकी वर्दी के लिए क्या छवि बनेगी. पुलिस हमेशा जनता से यह उम्मीद लगाती है कि वह नियमों का पालन करेगी. चाहे वह खुद नियमों का पालन न करें. मोटर व्हीकल एक्ट 2019 लागू होने के बाद कई जगह ऐसे पुलिस वाले भी देखने को मिले जो खुद नियमों को नहीं मान रहे थे. बिहार में जब एक युवक ने पूछा कि हेलमेट कहां है तो पहले तो उसने कुछ नहीं बताया. जब युवक ने कहा कि वर्दी फाड़ दूंगा तो पुलिस वाले ने जमकर पिटाई कर दी. ऐसे न जाने कितने वीडियो इंटरनेट पर देखने को मिल जाएँगे जिसमें पुलिस पब्लिक पर भारी पड़ रही है.

ऐसा भी नहीं है कि हमेशा पुलिस ही पीट रही होती है. कई बार जनता भी पुलिस को पीट देती है. लेकिन अब जरूरत है कि इस तरह की घटनाओं पर रोक लगे. क्योंकि यह देश संविधान से चलता है, नियमों से चलता है.

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First Published : 05 Nov 2019, 02:31:10 PM

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