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टीबी ग्रस्त महिला को हफ्ते भर में चार हार्ट अटैक, फिर भी बचा ली जान

कोमोरबिडिडिटीज का प्रबंधन करना, साथ ही रोगी को स्थिर रखना सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण था.

News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 12 Feb 2022, 11:24:38 AM
Offbeat

बीपी पीड़ित मरीज को टीबी भी था. ऐसे में डॉक्टरों ने बचाई जान. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

  • विशेष तरह का पेसमेकर भी लगाया गया महिला को
  • टीबी से पीड़ित थी महिला, साथ में बीपी भी है

नई दिल्ली:  

गंभीर टीबी की बीमारी होने के कारण करीब चार बार हृदय गति रुकने के बाद 51 वर्षीय एक महिला को नया जीवन दिया गया है. ये जानकारी डॉक्टरों ने दी है. सांस लेने में तकलीफ और शरीर में सूजन के साथ मरीज को फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया था. एक ईसीएचओ और प्रारंभिक क्लीनिकल टेस्ट से पता चला कि हृदय के चारों ओर बड़े पैमाने पर तरल पदार्थ जमा हो गया है, जिससे इसकी पंपिंग क्षमता प्रभावित हुई और आगे रक्तचाप में गिरावट आई. उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के लिए मेडिसिन थैरेपी दी.

इस स्तर पर हृदय की पंपिंग क्षमता में सुधार करना वास्तव में जरूरी था, जो केवल तरल पदार्थ के निकास से ही संभव था. पहले उसे एंटी-ट्यूबरकुलर थेरेपी दी गई. प्रारंभिक निदान ने पुष्टि की गई क्योंकि वह टीबी से पीड़ित थी. अस्पताल में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के सलाहकार डॉ. विवध प्रताप सिंह के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने कहा, कोमोरबिडिडिटीज का प्रबंधन करना, साथ ही रोगी को स्थिर रखना सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण था.

सिंह ने कहा, एंटी-ट्यूबरकुलर थेरेपी के दौरान, हमें एक और चुनौती का सामना करना पड़ा, जब रोगी को लगातार तेज हृदय गति (वेंट्रिकुलर टैचीयरिया) होने लगी. उसे पहले ही सप्ताह के भीतर चार कार्डियक अरेस्ट हो चुके थे. मरीज को कार्डियक मसाज और शॉक दिया गया और उन्हें बिना किसी वेंटिलेटर सपोर्ट के पुनर्जीवित किया गया. उसे एक विशेष प्रकार का पेसमेकर आईसीडी लगाया गया जो तेज हृदय गति में झटका देता है.

First Published : 12 Feb 2022, 11:24:38 AM

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