News Nation Logo
Breaking
पहले बड़े मंगल के मौके पर लखनऊ में बजरंगबली के मंदिरों पर दर्शनार्थियों की भीड़ मैरिटल रेप का मामला SC पहुंचा, याचिकाकर्ता खुशबू सैफी ने दिल्ली HC के फैसले को SC में चुनौती दी मुंबई : कार्तिक चिदंबरम और उनसे जुडे ठिकानों पर सीबीआई की छापेमारी दिल्ली : कुतुबमीनार के कुव्वुतुल इस्लाम मस्जिद मामले की याचिका पर साकेत कोर्ट में सुनवाई टली मथुरा जिला अदालत में एक और याचिका, शाही ईदगाह मस्जिद को सील करने की मांग दाऊद के करीबी और 1993 मुंबई धमाकों के वॉन्टेड आरोपियों को गुजरात ATS ने पकड़ा हरिद्वार हेट स्पीच मामला : जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी उर्फ़ वसिम रिज़वी को 3 महीने की अंतरिम जमानत जम्मू : म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन में गैर कानूनी लाउडस्पीकर बैन के प्रस्ताव के पारित होने पर हंगामा चिंतन शिविर के बाद हरियाणा कांग्रेस की कोर टीम आज शाम राहुल गांधी से करेगी मुलाकात वाराणसी कोर्ट में आज ज्ञानवापी सर्वे रिपोर्ट पेश नही होगी, तीन दिन का और समय मांगा जाएगा राजस्थान : पुलिस कांस्टेबल भर्ती में 14 मई की द्वितीय पारी की परीक्षा दोबारा ली जाएगी जम्मू कश्मीर : राजौरी इलाके के कई वन क्षेत्रों में भीषण आग, बुझाने में जुटे फायर टेंडर्स
Banner

3,500 साल पहले पहली बार परोसी गई थीं पकी पत्तेदार सब्जियां

पश्चिम अफ्रीका के दक्षिणी भाग में याम या उत्तर में सूखे सवाना में मोती बाजरा से बने मोटे दलिया के पूरक हैं.

News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 30 Jan 2022, 11:36:21 AM
Curry

एक नए शोध में हुआ खुलासा. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

  • साढ़े तीन हजार साल पहले हुई पश्चिमी अफ्रीकी व्यंजनों की उत्पत्ति
  • जर्मनी और ब्रिटेन के एंथ्रोपोलॉजिस्ट ने निकाला है यह निष्कर्ष

लंदन:  

पकी हुई पत्तेदार सब्जियां आज हमारे भोजन का एक बड़ा हिस्सा हैं, लेकिन अगर हम उनकी उत्पत्ति को देखें, तो पत्तेदार सब्जियां लगभग 3,500 साल पहले पश्चिम अफ्रीका में सबसे पहले बनाई गई थीं. पुरातत्वविदों और पुरातत्व-वनस्पतिविदों ने इसका पता लगाया है. जर्मनी के गोएथे विश्वविद्यालय और ब्रिटेन में ब्रिस्टल विश्वविद्यालय की टीमों ने 450 से अधिक पूर्व-ऐतिहासिक बर्तनों की जांच की और उनमें से 66 में लिपिड के निशान यानी पानी में अघुलनशील पदार्थ थे.

गोएथे विश्वविद्यालय में नोक अनुसंधान दल की ओर से ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के रसायनज्ञों ने लिपिड प्रोफाइल को यह प्रकट करने के उद्देश्य से निकाला कि किन पौधों का उपयोग किया गया था. जर्नल 'आर्कियोलॉजिकल एंड एंथ्रोपोलॉजिकल साइंसेज' में प्रकाशित परिणामों से पता चला कि 66 लिपिड प्रोफाइल में से एक तिहाई से अधिक ने बहुत विशिष्ट और जटिल वितरण प्रदर्शित किया. यह दर्शाता है कि विभिन्न पौधों की प्रजातियों और भागों को संसाधित किया गया था. गोएथे विश्वविद्यालय में अपनी विशेषज्ञता, पुरातत्व और पुरातत्व वनस्पति शोधकर्ताओं और ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के रासायनिक वैज्ञानिकों के संयोजन ने पुष्टि की कि इस तरह के पश्चिम अफ्रीकी व्यंजनों की उत्पत्ति 3,500 साल पहले की है.

ये पत्तेदार सॉस मसालों और सब्जियों के साथ-साथ मछली या मांस के साथ बढ़ाए जाते हैं और मुख्य पकवान के स्टार्च स्टेपल जैसे कि पश्चिम अफ्रीका के दक्षिणी भाग में याम या उत्तर में सूखे सवाना में मोती बाजरा से बने मोटे दलिया के पूरक हैं. लिपिड बायोमार्कर और स्थिर आइसोटोप के विश्लेषण की मदद से ब्रिस्टल के शोधकर्ता यह दिखाने में सक्षम थे कि मध्य नाइजीरिया में नोक लोगों ने अपने आहार में विभिन्न पौधों की प्रजातियों को शामिल किया. मध्य नाइजीरिया से कार्बोनाइज्ड पौधे के अवशेषों का उपयोग करके, यह साबित करना संभव था कि वह लोग मोती बाजरा उगाते थे. लेकिन क्या वे रतालू जैसे स्टार्च वाले पौधों का भी इस्तेमाल करते थे और बाजरा से वे कौन से व्यंजन बनाते थे, यह अब तक एक रहस्य बना हुआ है.

First Published : 30 Jan 2022, 11:36:21 AM

For all the Latest Offbeat News, Download News Nation Android and iOS Mobile Apps.