पहले था नॉर्मल...अब हो गया छिपकली जैसा चेहरा, आखिर कैसे पूरे परिवार के साथ ऐसा हुआ?

इंडोनेशिया के उत्तरी सुमात्रा का मानुरुंग परिवार अपने असामान्य चेहरे की वजह से सोशल मीडिया पर चर्चा में है. परिवार के कई सदस्य ट्रेचर कॉलिन्स सिंड्रोम नामक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से ग्रसित हैं. शुरुआती संघर्षों के बाद अब यह परिवार अपनी अलग पहचान बना चुका है.

इंडोनेशिया के उत्तरी सुमात्रा का मानुरुंग परिवार अपने असामान्य चेहरे की वजह से सोशल मीडिया पर चर्चा में है. परिवार के कई सदस्य ट्रेचर कॉलिन्स सिंड्रोम नामक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से ग्रसित हैं. शुरुआती संघर्षों के बाद अब यह परिवार अपनी अलग पहचान बना चुका है.

author-image
Ravi Prashant
New Update
viral lizard family

लिजार्ड फेस फैमली फोटो Photograph: (IG/mardiahmnr)

सोशल मीडिया की दुनिया में कब क्या वायरल हो जाए, यह कहना मुश्किल होता है. कभी कोई वीडियो, तो कभी कोई अनोखी कहानी लोगों का ध्यान खींच लेती है. इन दिनों इंडोनेशिया के उत्तरी सुमात्रा क्षेत्र का मानुरुंग परिवार सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. इस परिवार की पहचान उनके असामान्य चेहरे से जुड़ी है, जो पहली नजर में लोगों को चौंका देती है.

Advertisment

छिपकली जैसे चेहरे की वजह बनी बीमारी

मानुरुंग परिवार के कुछ सदस्यों के चेहरे की बनावट सामान्य से काफी अलग है, जिसे देखकर लोग अक्सर डर जाते हैं. कई लोग इन्हें मजाक या अफवाहों से जोड़ते रहे, लेकिन इसके पीछे एक गंभीर मेडिकल प्रॉब्लम है. परिवार ट्रेचर कॉलिन्स सिंड्रोम नामक एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से ग्रसित है. यह बीमारी चेहरे की हड्डियों और संरचना को प्रभावित करती है, जिससे चेहरा असामान्य दिखाई देता है.

परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी बीमारी

इस परिवार में कुल छह भाई-बहन हैं, जिनमें से चार इस बीमारी से प्रभावित हैं. बताया जाता है कि यह बीमारी उन्हें उनके पिता से आनुवंशिक रूप से मिली है. शुरुआती समय में परिवार और आसपास के लोग इसे किसी अभिशाप या बुरी आत्मा का असर मानते थे. समाज की इस सोच के कारण परिवार को मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ा.

गलत धारणियों से जागरूकता तक का सफर

समय के साथ जब चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने इस स्थिति को एक बीमारी के रूप में समझाया, तब लोगों की सोच में बदलाव आया. ट्रेचर कॉलिन्स सिंड्रोम को लेकर जागरूकता बढ़ी और यह साफ हुआ कि इसका व्यक्ति की बुद्धि या शारीरिक क्षमताओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता. यह केवल चेहरे की बनावट को प्रभावित करता है, न कि व्यक्ति की सोच या प्रतिभा को.

सोशल मीडिया से मिली नई पहचान

पहले जहां परिवार अपने चेहरे को लेकर असहज महसूस करता था, वहीं अब सोशल मीडिया ने उनकी जिंदगी बदल दी है. लोग उनके हौसले, आत्मविश्वास और सच्चाई को सराहने लगे हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनकी तस्वीरें और कहानियां वायरल हो रही हैं, जिससे उन्हें न सिर्फ पहचान मिली है, बल्कि कई लोगों के लिए यह जागरूकता और प्रेरणा का स्रोत भी बने हैं.

बीमारी के बावजूद सामान्य जीवन

ट्रेचर कॉलिन्स सिंड्रोम से पीड़ित होने के बावजूद मानुरुंग परिवार सामान्य जीवन जी रहा है. परिवार का कहना है कि समाज की स्वीकार्यता और सही जानकारी मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है. 

ये भी पढ़ें- इजरायल: जेनेटिक टेस्ट किट के नतीजों से मचा बवाल, जांच में पता चला एक 'बग' जिम्मेदार

Advertisment