Madhya Pradesh: मुरैल में एक मंदिर की छत गिरी, 3 बच्चियों की मौत, 5 जख्मी

Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश के मुरैना से बड़ी खबर सामने आ रही है. यहां पर एक मंदिर की छत गिरने से बड़ा हादसा हो गया है. इस हादसे में अब तक तीन बच्चियों को मौत की खबर है.

Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश के मुरैना से बड़ी खबर सामने आ रही है. यहां पर एक मंदिर की छत गिरने से बड़ा हादसा हो गया है. इस हादसे में अब तक तीन बच्चियों को मौत की खबर है.

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Dheeraj Sharma
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Muraina Accident

Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश के मुरैना से बड़ी खबर सामने आ रही है. यहां पर एक मंदिर की छत गिरने से बड़ा हादसा हो गया है. इस हादसे में अब तक तीन बच्चियों को मौत की खबर है. जबकि 5 अन्य लोग घायल हो गए हैं. मृतकों में दो सगी बहनें भी शामिल हैं. यह हादसा सोमवार दोपहर कैलारस थाना क्षेत्र के अहरौली गांव स्थित चामड़ माता मंदिर में हुआ.

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पूजा के दौरान टूटी मंदिर की जर्जर छत

चामड़ माता का यह मंदिर एक कमरे वाले पुराने भवन में बना हुआ है. मंदिर की छत पत्थर की पटियों से बनी थी, जो समय के साथ बेहद कमजोर हो चुकी थी. सोमवार को मुंगावली गांव निवासी सतीश गौड़ अपनी पत्नी गुड्डी के साथ मंदिर में पूजा करने पहुंचे थे. पूजा के बाद कन्याभोज और प्रसाद वितरण का आयोजन होना था, जिसके लिए गांव के कई बच्चों को मंदिर बुलाया गया था.

नारियल फोड़ते ही हुआ भयावह हादसा

दोपहर करीब 3:15 बजे पूजा के दौरान सतीश गौड़ ने नारियल फोड़ने के लिए उसे जमीन पर रखे पत्थर पर पटका. नारियल की हल्की सी आवाज और कंपन के साथ ही मंदिर की छत की पटियां चटक गईं और देखते ही देखते पूरी छत भरभरा कर नीचे गिर पड़ी. छत का मलबा मंदिर के अंदर मौजूद बच्चों और अन्य लोगों पर आ गिरा.

तीन मासूमों की गई जान, कई घायल

हादसे के बाद मंदिर परिसर में चीख-पुकार मच गई. आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला. इस हादसे में 11 वर्षीय वैष्णवी सिकरवार, 7 वर्षीय छाया गोस्वामी और 9 वर्षीय करिश्मा गोस्वामी की मौके पर ही मौत हो गई. इनमें छाया और करिश्मा सगी बहनें थीं.
वहीं 12 वर्षीय गुंजन, 8 वर्षीय परी, 6 वर्षीय विद्या, सतीश गौड़ और उनकी पत्नी गुड्डी गंभीर रूप से घायल हो गए. सभी घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां बालिका विद्या की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है.

छत पर रखा था भारी निर्माण सामग्री

ग्रामीणों के अनुसार यह मंदिर कई दशकों पुराना है और विवाह के बाद नवविवाहित जोड़े यहां पूजा करने आते हैं. कुछ दिन पहले ही मंदिर के गुंबद के निर्माण का कार्य शुरू हुआ था. इसके लिए मंदिर की छत पर ईंटें, रेत और अन्य निर्माण सामग्री रख दी गई थी. पत्थर की पुरानी पटियां इस भारी वजन को सहन नहीं कर सकीं और एक पटिया टूटते ही पूरी छत ढह गई.

लापरवाही पर उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि करीब सात साल पहले ही मंदिर की छत की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन निर्माण सामग्री छत पर रखने से पहले सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा गया. इस हादसे ने एक बार फिर पुराने धार्मिक स्थलों की जांच और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 

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