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बाबा रामदेव हेल्थ टिप्स Photograph: (fb/Swami Ramdev)
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग अपने स्वास्थ्य पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पा रहे हैं. अनियमित खानपान, तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण अनेक बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. इसी चिंता को लेकर योग गुरु स्वामी रामदेव ने अपने हालिया फेसबुक लाइव सत्र में लोगों को योग अपनाने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि अगर व्यक्ति प्रतिदिन थोड़े समय के लिए भी योग करे तो कई गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है.
बुनियादी से उन्नत योगासन की सलाह
लाइव सेशन के दौरान उन्होंने स्वयं योगासन करके दिखाए. उन्होंने कहा कि सबसे पहले व्यक्ति को बेसिक एक्सरसाइज से शुरुआत करनी चाहिए. सूर्यनमस्कार को संपूर्ण व्यायाम बताते हुए उन्होंने कहा कि इसे नियमित रूप से किया जाए. इसके साथ भुजंगासन और दंड नमस्कार करने की भी सलाह दी. उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिक करने की आवश्यकता नहीं है, जितना सहजता से हो सके उतना ही करें.
उन्होंने मुंडकासन और योग मुद्रा आसन का भी प्रदर्शन किया और बताया कि इनका अभ्यास दो-दो मिनट से प्रारंभ करना चाहिए. इसके अलावा स्थितकोण आसन और चक्रासन जैसे आसनों का उल्लेख करते हुए कहा कि अभ्यास को धीरे-धीरे साधना चाहिए. नियमितता ही सबसे महत्वपूर्ण तत्व है.
योग से तन और मन दोनों स्वस्थ
स्वामी रामदेव ने कहा कि रोज योग करने से शरीर फुर्तीला रहता है और मन शांत बना रहता है. उनका कहना था कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि मानसिक संतुलन का भी माध्यम है. प्राणायाम और ध्यान से तनाव कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे दवाइयों पर निर्भर रहने के बजाय प्राकृतिक जीवनशैली अपनाएं.
बवासीर, लिवर और किडनी रोगों पर सुझाव
लाइव सत्र में उन्होंने बवासीर, लिवर और किडनी से जुड़ी समस्याओं पर भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि बवासीर की समस्या होने पर रोजाना गोधन अर्क लेने से लाभ मिल सकता है. यदि इसका स्वाद पसंद न आए तो इसमें शहद मिलाकर सेवन किया जा सकता है. साथ ही खानपान संतुलित रखना जरूरी है.
उन्होंने शीर्षासन, हलासन, सर्वांगासन और चक्रासन को भी लाभकारी बताया. उनका दावा था कि नियमित अभ्यास से शरीर की आंतरिक प्रणाली मजबूत होती है और कई रोगों में सुधार देखा जा सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि योग करते समय सावधानी और सही मार्गदर्शन आवश्यक है.
शिक्षा व्यवस्था पर टिप्पणी
स्वास्थ्य चर्चा के दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आजकल लोग बच्चों की शिक्षा पर भारी रकम खर्च कर रहे हैं. बड़े-बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद में महंगे स्कूल खुल चुके हैं, जहां प्रवेश के लिए लाखों रुपये लिए जाते हैं. उन्होंने पारंपरिक गुरुकुल प्रणाली की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री नहीं बल्कि संस्कार होना चाहिए.
नियमितता ही है कुंजी
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने दोहराया कि योग को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए. थोड़े समय का नियमित अभ्यास भी बड़े बदलाव ला सकता है. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे स्वयं भी योग करें और परिवार को भी इसके लिए प्रेरित करें.
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