वैज्ञानिकों का अनोखा आविष्कार! अब घर बैठे इस अल्ट्रासाउंड डिवाइस से ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाना होगा आसान, जानिए कैसे

Breast Cancer Detection: MIT के वैज्ञानिकों ने स्मार्टफोन जितना छोटा पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड डिवाइस बनाया है, जो ब्रेस्ट कैंसर की पहचान घर बैठे आसान बना सकता है. यह हल्का, किफायती और AI-आधारित तकनीक से लैस है. चलिए आपको बताते हैं ये कैसे काम करता है?

Breast Cancer Detection: MIT के वैज्ञानिकों ने स्मार्टफोन जितना छोटा पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड डिवाइस बनाया है, जो ब्रेस्ट कैंसर की पहचान घर बैठे आसान बना सकता है. यह हल्का, किफायती और AI-आधारित तकनीक से लैस है. चलिए आपको बताते हैं ये कैसे काम करता है?

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Akansha Thakur
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Breast Cancer Detection

Breast Cancer Detection

Breast Cancer Detection: ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में सबसे आम हो गया है. एक अनुमान के अनुसार 8 में से एक महिला को इस कैंसर का खतरा होता है. कई लोग ऐसे है जो दूर रहने की वजह से डॉक्टर के पास समय से नहीं पहुंच पाते हैं जिसकी वजह से उनकी मौत हो जाती है. हाल ही में MIT के वैज्ञानिकों ने ऐसे अनोखे पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड डिवाइस का अविष्कार किया है जिसे देखर हर कोई हैरान है. इस डिवाइस से ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की पहचान की जा सकती है.

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इस डिवाइस की खास बात यह है कि इसे घर या छोटे क्लीनिक में भी आसानी से इस्तेामल किया जा सकता है. यह डिवाइस न सिर्फ हल्का है, बल्कि उन महिलाओं के लिए भी बेहद उपयोगी होगा, जो दूरदराज के इलाकों में रहती हैं और जहां अल्ट्रासाउंड की सुविधा आसानी से उपलब्ध नहीं होती. ऐसे में चलिए हम आपको बताते हैं ये डिवाइस कैसे काम करता है. 

स्मार्टफोन जितना छोटा

MIT की एसोसिएट प्रोफेसर कानन दागदेविरेन और उनकी टीम ने इस डिवाइस को डिजाइन किया है. आकार में यह एक स्मार्टफोन जितना छोटा है. इसमें एक छोटा प्रोसेसिंग मॉड्यूल होता है, जो फोन से थोड़ा ही बड़ा है. इस डिवाइस को बनाने में करीब 300 डॉलर (लगभग 25 हजार रुपये) का खर्च आया है. यह डिवाइस लैपटॉप से कनेक्ट होकर 3D इमेज दिखा सकता है. सबसे बड़ी बात, इसमें बहुत कम बिजली की जरूरत होती है. इसे सामान्य 5V DC अडैप्टर या बैटरी से भी चलाया जा सकता है.

कैसे काम करता है यह अल्ट्रासाउंड? 

सामान्य अल्ट्रासाउंड मशीन में प्रोब को शरीर पर दबाना पड़ता है. इससे कई बार इमेज की क्वालिटी खराब हो जाती है. MIT का नया डिवाइस त्वचा के ऊपर हल्के से रखा जाता है. इससे टिश्यू की ज्यादा साफ और सटीक 3D तस्वीर मिलती है. यह डिवाइस शरीर के अंदर करीब 15 सेंटीमीटर तक स्कैन कर सकता है. पूरे ब्रेस्ट की जांच 2 से 3 अलग-अलग पोजिशन से की जा सकती है.

टेस्टिंग में दिखा शानदार रिजल्ट

रिसर्च के मुताबिक, इस डिवाइस को 71 साल की महिला पर टेस्ट किया गया. टेस्ट के दौरान यह डिवाइस बिना किसी गैप के सिस्ट यानी गांठों की सटीक पहचान करने में सफल रहा. इससे साफ है कि यह तकनीक शुरुआती स्तर पर ही बीमारी पकड़ने में मदद कर सकती है.

AI के साथ होगा और स्मार्ट

वैज्ञानिक अब इस टेक्नोलॉजी को और छोटा करने पर काम कर रहे हैं. उनका लक्ष्य है कि प्रोसेसिंग सिस्टम नाखून जितना छोटा हो जाए. भविष्य में यह डिवाइस सीधे स्मार्टफोन से कनेक्ट हो सकेगा. इसके साथ एक AI-आधारित ऐप भी विकसित किया जा रहा है. यह ऐप यूजर को बताएगा कि सेंसर को शरीर के किस हिस्से पर और कैसे रखना है.

घर बैठे करें ब्रेस्ट कैंसर की जांच 

वैज्ञानिक इस तकनीक को बाजार में लाने के लिए कंपनी शुरू करने की तैयारी कर रही हैं. उनका लक्ष्य है कि ब्रेस्ट कैंसर की जांच उतनी ही आसान हो जाए, जितनी घर पर ब्लड प्रेशर चेक करना. अगर यह तकनीक आम लोगों तक पहुंचती है, तो लाखों महिलाओं की समय पर जांच संभव हो सकेगी.

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