Kite Festival 2026: भारत में कब और क्यों मनाया जाता है पतंग उत्सव? जानें इसका महत्व और विशेषताएं

Kite Festival 2026: वैसे तो मकर संक्रांति हर जगह खास होती है, लेकिन इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल इसे और भी ज्यादा मजेदार बना देता है. देश के अलग-अलग हिस्सों में इस मौके पर बड़े-बड़े काइट फेस्टिवल होते हैं, जहां आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है.

Kite Festival 2026: वैसे तो मकर संक्रांति हर जगह खास होती है, लेकिन इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल इसे और भी ज्यादा मजेदार बना देता है. देश के अलग-अलग हिस्सों में इस मौके पर बड़े-बड़े काइट फेस्टिवल होते हैं, जहां आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है.

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Akansha Thakur
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Kite Festival 2026

Kite Festival 2026

Kite Festival 2026: मकर संक्रांति अब करीब है और तैयारी जोर-शोर से चल रही है. इस खास दिन को और भी मजेदार बनाने के लिए भारत में हर साल शानदार काइट फेस्टिवल आयोजित किया जाता है. पतंग उड़ाना सिर्फ बच्चों का खेल नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपरा का अहम हिस्सा है. देश के अलग-अलग हिस्सों में इस मौके पर बड़े-बड़े काइट फेस्टिवल होते हैं, जहां आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है. अगर आप भी इस दिन को खास बनाने चाहते हैं तो उससे पहले जानते हैं कि पतंग उत्सव कब और क्यों मनाया जाता है और इसका महत्व क्या है? 

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काइट फेस्टिवल कहां-कहां होगा (Kite Festival 2026)

अहमदाबाद, गुजरात

अहमदाबाद का साबरमती रिवरफ्रंट 10 से 14 जनवरी तक इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल का केंद्र होगा.  भारत के अलावा जापान, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया से भी लोग हिस्सा लेंगे. बच्चों के लिए वर्कशॉप भी आयोजित की जाएगी.

दिल्ली

दिल्ली के सराय काले खां बंसरेरा पार्क में 16 से 18 जनवरी तक काइट फेस्टिवल होगा. यमुना के किनारे यह पार्क पतंग उड़ाने के लिए परफेक्ट है. 

समय: सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक

एंट्री: मुफ्त

कोटा, राजस्थान

कोटा में 11 से 14 जनवरी तक 'उड़ान काईट कार्निवल' का आयोजन होगा। यहां ड्रैगन, 3D और लाइटिंग पतंगों के साथ लाइव बैंड और गरबा की धूम भी मचेगी।

समय: सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक

सोलन, हिमाचल प्रदेश

सोलन में हिल स्टेशन के खुले मैदानों में पतंग उड़ाने का आनंद अलग ही होता है.

समय: सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक

हैदराबाद

सिकंदराबाद के परेड ग्राउंड में 13 से 15 जनवरी तक अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव होगा. 19 देशों की पतंगबाज इसमें हिस्सा लेंगे.

समय: सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक

क्यों मनाया जाता है पतंग उत्सव 

पतंग उत्सव मुख्य रूप से मकर संक्रांति पर मनाया जाता है, जो सूर्य के उत्तरायण होने (उत्तर दिशा की ओर यात्रा शुरू करने) और सर्दी के अंत का प्रतीक है, जो खुशी, आजादी और नई शुरुआत का उत्सव है, जिसमें लोग आसमान को रंगीन पतंगों से भर देते हैं, जो धार्मिक (सूर्य पूजा), ऐतिहासिक (भगवान राम), और स्वास्थ्य (विटामिन डी) कारणों से जुड़ा है, तथा यह एकता, मेलजोल और रचनात्मकता को बढ़ावा देता है. 

पतंग उत्सव की खासियत

पतंग उत्सव की खासियत है आसमान का रंग-बिरंगी पतंगों से सजना, पतंगबाजी की प्रतियोगिताएं, व्यंजन, संगीत, नृत्य आदि चीजे होती है. इसके अलावा सूर्य देव की पूजा, और अच्छी फसल के लिए आभार, जो मकर संक्रांति के अवसर पर मनाया जाता है, जिसमें लोग छतों से पतंगें उड़ाते हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेते हैं. यह उत्सव खुशी, उत्सव और प्रकृति के साथ जुड़ाव का प्रतीक है, खासकर गुजरात में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसे मनाया जाता है. 

क्यों खास है काइट फेस्टिवल? 

परिवार और बच्चे मिलकर पतंग महोत्सव का आनंद ले सकते हैं.

लोक संगीत और फोक परफॉर्मेंस का मजा लिया जा सकता है.

प्रोफेशनल काइट फ्लायर्स के शो का हिस्सा बन सकते हैं.

सर्दियों के स्ट्रीट फूड का स्वाद ले सकते हैं.

इको-फ्रेंडली पतंग स्टॉल्स में बांस और कागज की पतंगें मिलती हैं.

काइटफेस्टिवल पर जाने से पहले ध्यान रखें ये बात 

 प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए जल्दी पहुंचें.

रेशमी डोर से सावधान रहें.

बिजली की तारों से दूर रहें.

परिवार और दोस्तों के साथ जाएं 

हर राज्य के पारंपरिक स्नैक्सट्राई करें. 

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