केंद्रीय बजट 2026 से उद्योगों की बड़ी उम्मीदें; मैन्युफैक्चरिंग, पीएलआई, निर्यात और निवेश पर हो फोकस

केंद्रीय बजट 2026 से उद्योगों की बड़ी उम्मीदें; मैन्युफैक्चरिंग, पीएलआई, निर्यात और निवेश पर हो फोकस

केंद्रीय बजट 2026 से उद्योगों की बड़ी उम्मीदें; मैन्युफैक्चरिंग, पीएलआई, निर्यात और निवेश पर हो फोकस

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IANS
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केंद्रीय बजट 2026 से उद्योगों की बड़ी उम्मीदें; मैन्युफैक्चरिंग, पीएलआई, निर्यात और निवेश पर हो फोकस

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 24 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय बजट 2026 पेश होने में अब बस कुछ ही दिन शेष बचे हैं। इससे पहले उद्योग जगत की निगाहें सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं पर टिकी हैं। देश के विभिन्न क्षेत्रों में तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जेटवर्क के को-फाउंडर और सीईओ अमृत आचार्य ने आईएएनएस से बात की और इस बजट से कई उम्मीदें जताई हैं।

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अमृत आचार्य ने कहा कि केंद्र सरकार को यूनियन बजट 2026 में सार्वजनिक पूंजीगत खर्च को लगातार बढ़ाते रहना चाहिए। हर साल रेलवे, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर और सोलर जैसी परियोजनाओं पर सरकार का भारी खर्च मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मांग को बढ़ाने का बड़ा जरिया बनता है। सरकार खुद एक बड़ा खरीदार है, जिससे घरेलू उद्योगों को सीधा फायदा मिलता है।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से बजट में सार्वजनिक निवेश लगातार बढ़ा है और यही रफ्तार आगे भी बनी रहनी चाहिए। इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से न सिर्फ उद्योगों को ऑर्डर मिलते हैं, बल्कि रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलती है।

उन्होंने बताया कि बीते कुछ वर्षों में सरकार का फोकस प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) जैसी नीतियों पर रहा है, जिसका उद्देश्य भारत में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। चाहे इलेक्ट्रॉनिक्स हों, सोलर सेक्टर हो या ऑटो कंपोनेंट्स-पीएलआई ने मैन्युफैक्चरिंग को नई दिशा दी है और इसके सकारात्मक नतीजे अब दिखने लगे हैं।

अमृत आचार्य ने आगे कहा कि अब अगला कदम सिर्फ मेक इन इंडिया फॉर इंडिया तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मेक इन इंडिया फॉर ग्लोबल मार्केट की सोच अपनानी होगी। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अलग से विशेष प्रोत्साहन योजनाएं लानी चाहिए, ताकि भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकें।

उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सरकार समर्थित बीमा और क्रेडिट स्कीम्स हैं, जो निर्यातकों को जोखिम से सुरक्षा देती हैं। भारत में भी इसी तरह की किसी व्यवस्था की जरूरत है, ताकि निर्यातक अमेरिका और अन्य देशों में सामान भेजते समय ज्यादा आत्मविश्वास के साथ काम कर सकें।

अमृत आचार्य ने यह भी कहा कि भारत में पूंजी की लागत यानी लोन और फंडिंग अभी कई देशों के मुकाबले ज्यादा है। यदि सरकार आने वाले वर्षों में इसे कम करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कदम उठाती है, तो उद्यमियों का जोखिम उठाने का साहस बढ़ेगा और निवेश में तेजी आएगी।

उन्होंने सरकार की नीति व्यवस्था की तारीफ करते हुए कहा कि मौजूदा नीति माहौल सहयोगी, स्थिर और दूरदर्शी है। सरकार उद्योग की बात सुनती है और एक बार लिए गए फैसलों को वापस नहीं लेती। पीएलआई इसका सबसे अच्छा उदाहरण है, जहां शुरुआती वर्षों में भले नतीजे न दिखें, लेकिन लंबे समय में इसका बड़ा असर सामने आता है।

आचार्य ने कहा कि आज भारत आईफोन समेत मोबाइल का सबसे बड़ा निर्यातक बन चुका है और यह पीएलआई जैसी नीतियों के बिना संभव नहीं था। अब सरकार पीएलआई 2.0 के जरिए सिर्फ असेंबली नहीं, बल्कि कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पर भी जोर दे रही है, जिससे सोलर और अन्य उद्योगों को भी फायदा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2026 से उनकी दो बड़ी अपेक्षाएं हैं। पहली, सार्वजनिक पूंजीगत खर्च में निरंतर बढ़ोतरी और दूसरी, निर्यातकों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं। उनका मानना है कि इन्हीं कदमों से भारत की मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नई रफ्तार मिलेगी।

--आईएएनएस

डीबीपी/वीसी

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