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दिल्ली में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में 16 वर्षीय राउल जॉन अजू ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया. ‘AI Kid of India’ के नाम से पहचाने जाने वाले राउल ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की. इस अवसर को उन्होंने अपने जीवन का खास पल बताया. राउल को समिट में इसलिए आमंत्रित किया गया क्योंकि वे कम उम्र में ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम कर चुके हैं और बड़ी संख्या में छात्रों को प्रशिक्षण दे चुके हैं.
खुद सीखा, हजारों को सिखाया
राउल का दावा है कि वे अब तक लगभग 1.5 लाख छात्रों और कई कंपनियों को AI की ट्रेनिंग दे चुके हैं. खास बात यह है कि उन्होंने अधिकतर तकनीकी ज्ञान खुद सीखा. यूट्यूब वीडियो, ऑनलाइन संसाधनों और माता-पिता के मार्गदर्शन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया. 12 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला रोबोट बनाया और आगे चलकर ‘AI Realm Technologies’ नाम से कंपनी की शुरुआत की.
वे IIT मद्रास, Google समेत कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में AI पर सत्र ले चुके हैं. भारत के अलावा UAE, अमेरिका और ब्रिटेन में भी उन्होंने छात्रों और पेशेवरों को संबोधित किया है.
'MeBot' आवाज में पढ़ाने वाला रोबोट
राउल का बनाया ‘MeBot’ रोबोट उनकी ही आवाज में छात्रों को पढ़ाता है. यह Jetson Nano तकनीक पर आधारित है और जटिल AI अवधारणाओं को सरल भाषा में समझाने के लिए डिजाइन किया गया है. राउल इसे मजाक में अपना ‘क्लोन’ कहते हैं, जो उनके आराम करने के दौरान भी बच्चों को पढ़ा सकता है. उनका लक्ष्य है कि तकनीक को छोटे बच्चों के लिए भी सुलभ और रोचक बनाया जाए.
AI की सरल परिभाषा
मुंबई के एक कार्यक्रम में राउल ने AI को बेहद आसान शब्दों में समझाया. उनके अनुसार, AI वही तकनीक है जो मोबाइल में ऑटो-करेक्ट या यूट्यूब पर सुझाव देती है. यह पैटर्न पहचानकर अगले कदम का अनुमान लगाती है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि AI इंसानों की तरह सोचती नहीं है; गलत डेटा मिलने पर वह गलत परिणाम दे सकती है, जिसे ‘हॉलुसीनेशन’ कहा जाता है. साथ ही बड़े AI मॉडल्स के ऊर्जा खपत पर भी उन्होंने चिंता जताई.
भविष्य और शिक्षा पर नजर
राउल का मानना है कि AI नौकरियां खत्म नहीं करेगी, बल्कि जो लोग AI का बेहतर उपयोग करेंगे वे आगे बढ़ेंगे. उनके अनुसार, भविष्य में रचनात्मकता, प्रबंधन कौशल और मानवीय समझ ज्यादा अहम होगी. वे शिक्षा प्रणाली में बदलाव की भी वकालत करते हैं, जहां रटने की बजाय जिज्ञासा और प्रयोग को बढ़ावा मिले. दिलचस्प यह है कि करोड़ों की कंपनी संभालने के बावजूद राउल अब भी नियमित स्कूल जाते हैं, ताकि सामान्य जीवन का संतुलन बनाए रख सकें.
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