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What is Pax Silica: अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर के बयान के बाद एक बार फिर भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी सुर्खियों में है. भारत को अमेरिका के नेतृत्व वाली Pax Silica पहल में शामिल होने का निमंत्रण दिया जाना केवल कूटनीतिक कदम नहीं, बल्कि वैश्विक तकनीकी और आपूर्ति-श्रृंखला राजनीति में भारत की भूमिका को नई ऊंचाई देने वाला संकेत माना जा रहा है.
क्या है Pax Silica?
Pax Silica अमेरिका की अगुवाई में शुरू की गई एक रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य सिलिकॉन और हाई-टेक आधारित वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित और मजबूत बनाना है. यह पहल क्रिटिकल मिनरल्स से लेकर सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा इनपुट और लॉजिस्टिक्स तक पूरे टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को कवर करती है.
इसका मूल लक्ष्य उन संवेदनशील निर्भरताओं को कम करना है, जिन पर भविष्य की आर्थिक शक्ति, राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी नेतृत्व निर्भर करता है.
क्यों शुरू की गई Pax Silica?
बीते वर्षों में वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं और तकनीकी प्रतिस्पर्धा ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को यह महसूस कराया कि सिलिकॉन, सेमीकंडक्टर और AI जैसी तकनीकों में भरोसेमंद साझेदारों के साथ मिलकर काम करना जरूरी है.
Pax Silica किसी देश को अलग-थलग करने की पहल नहीं है, बल्कि इसे अमेरिकी अधिकारी 'पॉजिटिव-सम पार्टनरशिप' बताते हैं, जहां सभी साझेदार देशों को तकनीकी और आर्थिक लाभ मिल सके.
Pax Silica के मौजूदा सदस्य देश
अब तक इस पहल में कई तकनीकी रूप से मजबूत और रणनीतिक देश शामिल हो चुके हैं. इनमें...
- जापान
- दक्षिण कोरिया
- सिंगापुर
- नीदरलैंड
- यूनाइटेड किंगडम
- इजराइल
- संयुक्त अरब अमीरात
- ऑस्ट्रेलिया
इसके अलावा ताइवान, यूरोपीय संघ, कनाडा और OECD ने भी अतिथि योगदान दिया है. ये सभी देश वैश्विक सेमीकंडक्टर और AI सप्लाई चेन में अहम भूमिका निभाते हैं.
भारत को क्यों मिल रहा है आमंत्रण?
भारत तेजी से सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल इकोनॉमी और AI के क्षेत्र में उभर रहा है. सरकार की 'मेक इन इंडिया' और 'डिजिटल इंडिया' जैसी पहलों ने भारत को एक भरोसेमंद टेक्नोलॉजी पार्टनर के रूप में स्थापित किया है.
सर्जियो गोर के अनुसार, भारत और अमेरिका के रिश्ते केवल फायदे पर नहीं, बल्कि भरोसे और संवाद पर आधारित हैं और यही Pax Silica की सोच से मेल खाता है.
भारत को Pax Silica से क्या फायदा होगा?
भारत की संभावित सदस्यता से कई अहम लाभ मिल सकते हैं:
- सेमीकंडक्टर और AI में निवेश बढ़ेगा
- ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी मजबूत होगी
- क्रिटिकल मिनरल्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग तक बेहतर पहुंच
- नीति समन्वय और निष्पक्ष बाजार प्रथाओं में भागीदारी
- दीर्घकालिक तकनीकी सुरक्षा और रणनीतिक लचीलापन
यह भारत को केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक टेक्नोलॉजी वैल्यू चेन का अहम भागीदार बना सकता है.
रणनीतिक तौर पर क्यों अहम है यह कदम?
AI और सेमीकंडक्टर राष्ट्रीय शक्ति और आर्थिक प्रतिस्पर्धा के नए मानक बन चुके हैं. ऐसे में Pax Silica जैसी पहलें भविष्य की वैश्विक तकनीकी व्यवस्था को आकार देंगी. भारत का इसमें शामिल होना उसकी बढ़ती तकनीकी महत्वाकांक्षाओं और वैश्विक मंच पर बढ़ते प्रभाव को साफ तौर पर दर्शाता है.
Pax Silica में भारत की प्रस्तावित एंट्री भारत-अमेरिका संबंधों को नई रणनीतिक गहराई दे सकती है. यह कदम भारत को भविष्य की तकनीक, सुरक्षित सप्लाई चेन और वैश्विक नवाचार के केंद्र में लाने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर साबित हो सकता है.
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