AI से पूरे समाज को मिलेगा फायदा, टेक लीडर्स से मिलने पर बोले उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन

नई दिल्ली में चल रहे 'इंडिया एआई समिट 2026' के दौरान उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने टेक दिग्गजों से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि एआई से न केवल सरकारी कामकाज बेहतर होगा, बल्कि यह नौकरियों के नए रास्ते भी खोलेगा. वहीं पीएम मोदी ने आगाह किया कि बिना मानवीय मूल्यों के यह तकनीक खुद के लिए खतरा बन सकती है.

नई दिल्ली में चल रहे 'इंडिया एआई समिट 2026' के दौरान उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने टेक दिग्गजों से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि एआई से न केवल सरकारी कामकाज बेहतर होगा, बल्कि यह नौकरियों के नए रास्ते भी खोलेगा. वहीं पीएम मोदी ने आगाह किया कि बिना मानवीय मूल्यों के यह तकनीक खुद के लिए खतरा बन सकती है.

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Ravi Prashant
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VP C.P. Radhakrishnan

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन Photograph: (ANI)

दिल्ली के उपराष्ट्रपति भवन में शुक्रवार को एक खास मुलाकात हुई. उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने 'इंडिया एआई समिट 2026' में हिस्सा लेने आए दुनिया भर के सीईओ और डेलीगेट्स से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने भरोसा जताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से काम करने के तरीके में सटीकता आएगी और इसका बड़ा फायदा पूरे समाज को मिलेगा.

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नौकरियों के छिनने का डर होगा खत्म?

अक्सर लोगों के मन में डर रहता है कि एआई आने से नौकरियां चली जाएंगी, लेकिन उपराष्ट्रपति ने इस पर सकारात्मक बात कही. उन्होंने कहा कि यह तकनीक पुराने काम करने के तरीकों को तो बदलेगी ही, साथ ही बिल्कुल नए तरह के रोजगार के मौके भी पैदा करेगी. मुलाकात के दौरान टेक दिग्गजों ने भी माना कि भारत एआई के मामले में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है, खासकर सेहत, पढ़ाई और रोजगार के क्षेत्र में.

इंसानी मूल्यों के बिना एआई खुद के लिए खतरा

इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट के दौरान एआई के सही और नैतिक इस्तेमाल का रोडमैप पेश किया. पीएम ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि अगर तकनीक को इंसानी मूल्यों और सही दिशा के बिना छोड़ दिया गया, तो यह विनाशकारी साबित हो सकती है. उन्होंने कहा कि तकनीक के साथ 'इंसानी भरोसे' का होना बहुत जरूरी है.

तीन बड़े सुझाव और पारदर्शिता की मांग

प्रधानमंत्री ने एआई के भविष्य के लिए तीन खास सुझाव दिए. उन्होंने कहा कि अगर एआई को दी जाने वाली जानकारी (डेटा) सही और सुरक्षित नहीं होगी, तो नतीजा भी भरोसेमंद नहीं होगा. इसलिए दुनिया भर में एक भरोसेमंद डेटा फ्रेमवर्क होना चाहिए. पीएम ने मांग की कि कंपनियां अपनी एआई तकनीक को पारदर्शी बनाएं. यह 'छुपा हुआ खेल' (ब्लैक बॉक्स एल्गोरिदम) खत्म होना चाहिए ताकि पता चल सके कि एआई फैसले कैसे ले रहा है. भारत एक ऐसा माहौल बनाना चाहता है जहां तकनीक इंसान की भलाई के लिए काम करे, न कि उसे नुकसान पहुंचाने के लिए.

ग्लोबल मंच पर भारत की धमक

इंडिया एआई समिट 2026 ने साबित कर दिया है कि भारत एआई की दुनिया में एक बड़ा खिलाड़ी बनकर उभरा है. पीएम मोदी की इस पहल की उपराष्ट्रपति ने भी तारीफ की और कहा कि यह आयोजन भारत को ग्लोबल टेक मैप पर सबसे आगे खड़ा करता है. इस समिट में दुनिया भर के नीति निर्माता और टेक एक्सपर्ट्स एआई के असर पर मंथन कर रहे हैं.

ये भी पढ़ें- पीएम मोदी के साथ मंच पर भिड़े एआई के दिग्गज, आखिर सैम ऑल्टमैन ने ऐसा क्यों किया?

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