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पीएम नरेंद्र मोदी Photograph: (X/PMMODI)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में देश के रेल नेटवर्क को और बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया गया है सरकार ने तीन प्रमुख रेल मार्गों कसारा-मनमाड, दिल्ली-अंबाला और बल्लारी-होसपेटे के विस्तार (मल्टी-ट्रैकिंग) को मंजूरी दे दी है यह पूरा काम दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक के 12 जिलों से होकर गुजरेगा, जिससे करीब 389 किलोमीटर का नया ट्रैक तैयार होगा
18,500 करोड़ से बदलेगी रेलवे की तस्वीर
इन तीनों प्रोजेक्ट्स पर कुल 18,509 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है सरकार का लक्ष्य है कि इन्हें साल 2030-31 तक पूरा कर लिया जाए सबसे अच्छी बात यह है कि इस काम के दौरान भारी संख्या में लोगों को काम मिलेगा आंकड़ों के मुताबिक, निर्माण के दौरान करीब 265 लाख 'ह्यूमन-डेज' (काम के दिन) का सीधा रोजगार पैदा होगा
धार्मिक स्थलों और पर्यटन केंद्रों तक पहुंचना होगा आसान
इन नई रेल लाइनों के बिछने से देश के कई प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों और पवित्र मंदिरों तक का सफर काफी सुगम हो जाएगा. अब श्रद्धालु और पर्यटक महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, भावली डैम और घाटनदेवी मंदिर जैसे स्थानों के साथ-साथ उत्तर भारत में श्री माता वैष्णो देवी मंदिर तक आसानी से पहुंच सकेंगे. इसके अलावा कर्नाटक के हम्पी में स्थित विजय विट्ठल मंदिर, बल्लारी किला, दारोजी स्लोथ बीयर सेंचुरी और तुंगभद्रा डैम जैसे प्रमुख स्थलों की यात्रा भी पहले से कहीं ज्यादा सरल हो जाएगी.
पर्यावरण और जेब दोनों को होगा बड़ा फायदा
रेलवे की इस बढ़ती क्षमता से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को भी बड़ा फायदा होगा. सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का खर्च कम होने से माल ढोना सस्ता हो जाएगा और रेल नेटवर्क बेहतर होने से तेल के आयात पर निर्भरता भी कम होगी. इसके साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आने से पर्यावरण को पहुंचने वाला नुकसान भी काफी हद तक कम हो जाएगा, जिससे यह प्रोजेक्ट पर्यावरण और आम जनता की जेब दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा.
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