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प्रतिकात्मक फोटो
UGC equity regulations stay 2026: उच्च शिक्षा में जाति-आधारित भेदभाव और असमानता को खत्म करने के लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने जनवरी 2026 में नए 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस' जारी किए थे.इन नियमों में कैंपस में समानता बढ़ाने, शिकायतों के लिए इक्विटी कमिटी बनाने, सख्त जांच टाइमलाइन और गैर-अनुपालन पर फंडिंग रोकने जैसे प्रावधान थे.लेकिन इन नियमों को लेकर देशभर में विवाद और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए.जिसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा.
कोर्ट में दायर याचिकाकर्ताओं में इन्हें अस्पष्ट, दुरुपयोग की संभावना वाला और सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभावपूर्ण बताया.आज (29 जनवरी 2026) को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की पीठ ने इन नए नियमों पर तत्काल रोक लगा दी.कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि नियमों की भाषा स्पष्ट नहीं है, इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है और ये समाज को विभाजित करने की दिशा में जा सकते हैं.CJI ने टिप्पणी की कि 75 साल बाद भी हम जाति-रहित समाज की ओर बढ़ रहे हैं या पीछे? क्या हम संस्थानों में एकता की बजाय अलगाव को बढ़ावा दे रहे हैं?
I am glad that Hon SC stepped in and stayed the UGC guidelines which were vague, arbitrary and an attempt to create further discrimination on campuses.
— Priyanka Chaturvedi🇮🇳 (@priyankac19) January 29, 2026
I was trolled, abused and slurs thrown my way using my surname, so be it. What goes against natural course of justice I will… pic.twitter.com/I8GV7n3UNU
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ये की टिप्पणी
कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी किया और नए नियमों को फिर से तैयार करने का सुझाव दिया है. अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए UGC के 2012 वाले पुराने नियमों को फिर से प्रभावी कर दिया.ये 2012 के नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव (खासकर जाति, लिंग, क्षेत्र आदि आधारित) रोकने के लिए थे, लेकिन वे ज्यादातर सलाहकारी (advisory) थे।
2012 के नियमों में मुख्य बातें क्या हैं?
- संस्थानों को भेदभाव-रहित माहौल बनाने की सलाह.
- जाति, धर्म, लिंग, क्षेत्र या आर्थिक स्थिति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं.
- शिकायतों के लिए ग्रिवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म.
- लेकिन ये सख्ती से लागू नहीं होते थे, कोई स्पष्ट टाइमलाइन या दंड नहीं था.
UGC के नए नियम क्यों लाए गए थे?
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अब नए नियमों पर रोक के साथ सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को फिलहाल 2012 के फ्रेमवर्क का ही पालन करना होगा.वहीं, सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को होगी.जहां कोर्ट नए नियमों की संवैधानिक वैधता की जांच करेगा.शिक्षाविद्दों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला लाखों छात्रों, खासकर सामान्य वर्ग के लिए बड़ी है, जबकि SC/ST/OBC समुदायों के लिए भेदभाव रोकने की मजबूत व्यवस्था की मांग अब भी जारी है.बता दें कि UGC के नए नियम NEP 2020 और पुराने मामलों (जैसे रोहित वेमुला, पायल तड़वी) के संदर्भ में लाए गए थे, लेकिन कोर्ट ने इन्हें 'पीछे की ओर कदम' करार दिया।
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