'बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा और नमाज एक साथ', भोजशाला मामले पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

SC: मध्य प्रदेश के धार जिले के ऐतिहासिक भोजशाला में बसंत पंचमी के अवसर पर हिंदू पक्ष मां सरस्वती की पूजा-अर्चना करेगा तो वहीं मुस्लिम पक्ष भी जुमे की नमाज अदा कर सकेगा.

SC: मध्य प्रदेश के धार जिले के ऐतिहासिक भोजशाला में बसंत पंचमी के अवसर पर हिंदू पक्ष मां सरस्वती की पूजा-अर्चना करेगा तो वहीं मुस्लिम पक्ष भी जुमे की नमाज अदा कर सकेगा.

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Suhel Khan
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Supreme Court on Bhojpur case 22 january

भोजपुर मामले पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी Photograph: (Social Media)

Supreme court: मध्य प्रदेश के धार जिले के भोजशाला में बसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती पूजा करने के लिए दायर की गई याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने इस अवसर पर सरस्वती पूजा और नमाज दोनों का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बसंत पंचमी के अवसर पर भोजशाला में सरस्वती पूजा और नमाज दोनों होंगी.

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1 बजे से 3 बजे तक अदा कर सकेंगे नमाज

सुप्रीम कोर्ट ने बसंत पंचमी के दिन ऐतिहासिक भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदुओं को प्रार्थना करने की अनुमति दी है. इसके साथ ही दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज का वक्त भी तय किया है. मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि, हम दोनों पक्षों से अपील करते हैं कि वे आपसी सम्मान और सहयोग बनाए रखें. इसके साथ ही एससी ने राज्य और जिला प्रशासन को कानून व्यवस्था बनाए रखने की भी हिदायत दी है. 

जानें क्या है पूरा मामला?

दरअसल, मध्य प्रदेश के धार जिले के ऐतिहासिक भोजशाला में बसंत पंचमी के अवसर पर सिर्फ हिंदुओं को मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की अनुमति देने के लिए हिंदू पक्ष ने याचिका दायर की थी. इसके साथ ही हिंदू पक्ष ने अपनी याचिका में इस अवसर मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने से रोकने की मांग की थी. बता दें कि इस बार बसंत पंचमी का त्योहार शुक्रवार यानी 23 जनवरी को है. ऐसे में हिंदू पक्ष भोजशाला में मां सरस्वती की पूजा करता है. जबकि मुस्लिम समुदाय के लोग जुमा की नमाज अदा करते हैं.

एससी ने दोनों पक्षों के बीच समन्वय स्थापित करने पर दिया जोर

याचिका पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों के बीच समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया, जिससे सभी की धार्मिक भावनाओं का सम्मान हो सके. हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस (HFJ) की ओर से दायर की गई याचिका पर सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने सुनवाई की. याचिका में हिंदू संगठन ने भोजशाला को हिंदू मंदिर मानते हुए सरस्वती पूजा के लिए विशेष अनुमति की मांगी थी.

अलग-अलग स्थान उपलब्ध कराने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि, बसंत पंचमी के अवसर पर शुक्रवार को भोजशाला परिसर में बैरिकेडिंग और पंडाल लगाकर दोनों पक्षों को अलग-अलग स्थान उपलब्ध कराए जाएं. हालांकि इस दौरान दोनों पक्षों के प्रवेश और निकलने के लिए अलग-अलग द्वार की व्यवस्था करनी होगी. इसके साथ ही कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष से कहा है कि उसे गुरुवार शाम तक धार के जिला मजिस्ट्रेट को नमाज के लिए आने वाले लोगों की अनुमानित संख्या की जानकारी देनी होगी. ताकि उनके लिए पास जारी किए जा सकें.

दोनों पक्षों ने क्या दी एससी में दलील

मध्य प्रदेश सरकार की ओर से एससी में पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने कहा कि मुख्य याचिका पहले से ही अप्रभावी हो चुकी है. अब ये आवेदन एक लंबित मामले को लेकर दायर किया गया है. एएसजी ने कोर्ट को बताया कि पहले की व्यवस्थाओं के अनुसार कानून-व्यवस्था के इंतजाम किए जा सकते हैं. जबकि मस्जिद कमेटी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने दलील दी कि इससे पहले भी तीन बार बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ चुकी है. एएसआई ने हिंदू पक्ष को तीन घंटे तक पूजा करने की अनुमति दी है. खुर्शीद ने कहा कि, एक बार फिर से ऐसा होने जा रहा है, जुमा की नमाज दोपहर एक से तीन बजे तक होती है और हम 3 बजे तक स्थान खाली कर देंगे. उन्होंने कहा कि हम बेहद कम समय मांग रहे हैं.

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