/newsnation/media/media_files/2026/03/05/india-have-25-day-stock-of-oil-2026-03-05-18-12-48.jpg)
दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत में पेट्रोलियम और गैस की कीमतों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों में संभावित बाधाओं को देखते हुए आम लोगों में यह चिंता उठ रही है कि क्या देश में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस महंगी हो सकती है. हालांकि सरकारी सूत्रों ने साफ किया है कि फिलहाल ऐसी किसी बड़ी चिंता की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि भारत के पास पर्याप्त भंडार और वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था मौजूद है. हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में ये दावा है कि देश में 25 दिन का ही तेल का स्टॉक बचा है. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में कीमतें बढ़ सकती हैं या फिर दिक्कत हो सकती है. हालांकि सरकार का दावा है कि उन्होंने प्लान बी तैयार कर लिया है और वह इससे निपटने को तैयार भी है.
25 दिनों का कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों का भंडार
सरकार के मुताबिक देश में इस समय कच्चे तेल का लगभग 25 दिनों का रणनीतिक भंडार सुरक्षित रखा गया है. इसके साथ ही पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन जैसे तैयार ऊर्जा उत्पादों का भी लगभग 25 दिनों का अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है.
इस व्यवस्था को भारत का रणनीतिक ऊर्जा सुरक्षा ढांचा माना जाता है, जो किसी आपात स्थिति में भी देश की जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है. सरकार का कहना है कि अगर समुद्री मार्गों में अस्थायी बाधा आती है या वैश्विक आपूर्ति पर असर पड़ता है, तब भी घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता पर तुरंत कोई संकट नहीं आएगा.
वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर भी ध्यान
ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखने के लिए भारत कई देशों के साथ संपर्क बनाए हुए है. सरकार के अनुसार अगर पश्चिम एशिया के किसी प्रमुख सप्लायर से आपूर्ति प्रभावित होती है तो कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों से वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है.
भारत पहले से ही अपने कुल तेल आयात का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका से ले रहा है. इसके अलावा वैश्विक ऊर्जा संगठनों जैसे ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज और इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के साथ भी संवाद जारी है ताकि आपूर्ति और बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके.
गैस आपूर्ति को लेकर भी सरकार सतर्क
पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के कारण कुछ लोगों को यह चिंता भी है कि अगर खाड़ी क्षेत्र से गैस की आपूर्ति बाधित होती है तो भारत में एलपीजी और एलएनजी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है. हालांकि सरकार का कहना है कि एलपीजी और एलएनजी के प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा गया है. यदि किसी कारण से कतर जैसे देशों से गैस आपूर्ति में कमी आती है, तब भी अन्य देशों से वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है.
आम उपभोक्ताओं पर कीमतों का सीमित असर
सरकारी सूत्रों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव होना सामान्य बात है, लेकिन इसका घरेलू उपभोक्ताओं पर बहुत बड़ा असर पड़ने की संभावना फिलहाल नहीं है.
सरकार का भरोसा: आपूर्ति व्यवस्था मजबूत
सरकार का कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा के मामले में भारत ने पिछले कुछ वर्षों में मजबूत व्यवस्था विकसित की है. रणनीतिक भंडार, बहु-स्रोत आयात नीति और वैकल्पिक आपूर्ति नेटवर्क की वजह से किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हुई है.
इसी वजह से समुद्री मार्गों में रुकावट या क्षेत्रीय संघर्ष की स्थिति में भी देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सकता है.
सरकारी सूत्रों ने भरोसा दिलाया है कि फिलहाल पेट्रोल पंपों पर किसी तरह की कमी या कीमतों में अचानक तेज उछाल की संभावना नहीं है. मजबूत भंडार और वैकल्पिक स्रोतों के चलते आम लोगों को ईंधन आपूर्ति को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है.
स्टॉक करने से नहीं होगा नुकसान
जानकारों की मानेें तो अगर आपकी खपत ज्यादा तेल या गैस की है तो आपको पहले से ही स्टॉक कर लेना चाहिए. युद्ध के वक्त में कुछ भी पहले से कहा जाना काफी मुश्किल होता है. लिहाजा अगर आप स्टॉक कर लेते हैं तो आप आने वाले एक-दो महीने तक इस संकट से बचे रहेंगे. कीतमों में हेर-फेर भी होता है तो आपको ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी.
यह भी पढ़ें - कितने दिन सीएम और सांसद दोनों पदों पर काबिज रह सकते हैं नीतीश कुमार, जानें क्या कहता है नियम?
/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
Follow Us