/newsnation/media/media_files/2026/01/09/shashi-tharoor-file-2026-01-09-08-03-10.jpg)
Photograph: (ANI)
तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने पार्टी के साथ मतभेदों की चर्चाओं के बीच बड़ा बयान दिया है. थरूर ने साफ कहा है कि उन्होंने कभी भी संसद में कांग्रेस के आधिकारिक रुख का उल्लंघन नहीं किया. केरल लिटरेचर फेस्टिवल में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए थरूर ने स्पष्ट किया कि सिद्धांतों के स्तर पर उनका एकमात्र मतभेद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर था और इस पर उन्होंने जो रुख अपनाया, उस पर उन्हें कोई पछतावा नहीं है.
ऑपरेशन सिंदूर पर क्यों था अलग नजरिया
शशि थरूर ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे पर उन्होंने एक प्रेक्षक और लेखक के तौर पर अपनी राय रखी थी. पहलगाम हमले के बाद लिखे गए अपने अखबारी कॉलम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को बिना जवाब के नहीं छोड़ा जा सकता. उनका मानना था कि आतंकवाद के खिलाफ सख्त और स्पष्ट संदेश देना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे हमलों पर लगाम लगाई जा सके.
सीमित कार्रवाई और विकास पर जोर
थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका रुख किसी बड़े युद्ध या लंबे संघर्ष के पक्ष में नहीं था. उन्होंने कहा कि भारत को विकास के रास्ते से भटकाकर पाकिस्तान के साथ अंतहीन टकराव में नहीं फंसना चाहिए. किसी भी कार्रवाई का दायरा सिर्फ आतंकी ठिकानों तक सीमित रहना चाहिए. थरूर के अनुसार, उन्हें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि भारत सरकार ने बाद में लगभग वही कदम उठाए, जिनका उन्होंने सुझाव दिया था.
राष्ट्रीय हित सर्वोपरि
अपने बयान में थरूर ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति से जुड़ा कोई भी सवाल हो, उसमें देश को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा, 'राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन जब बात भारत की सुरक्षा और सम्मान की हो, तो भारत की ही जीत होनी चाहिए.'
कांग्रेस नेतृत्व से दूरी की अटकलें
थरूर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस नेतृत्व के साथ उनकी कथित तनातनी को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि राहुल गांधी द्वारा कोच्चि के एक कार्यक्रम में उन्हें नजरअंदाज किए जाने और केरल के कुछ नेताओं द्वारा कथित तौर पर उन्हें हाशिये पर रखने से वे असहज हैं. हालांकि, थरूर ने इन अटकलों पर सीधे तौर पर टिप्पणी करने से बचते हुए अपने सिद्धांतों और राष्ट्रीय हित को ही अपनी प्राथमिकता बताया.
संतुलन और जिम्मेदारी का संदेश
शशि थरूर के बयान से यह साफ झलकता है कि वह पार्टी अनुशासन और व्यक्तिगत विचारों के बीच संतुलन बनाए रखना चाहते हैं. उनका संदेश यही है कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन देश की सुरक्षा और सम्मान के सवाल पर एकजुटता सबसे अहम है.
यह भी पढ़ें - उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और रिसर्च पर हो फोकस, बजट 2026-27 को लेकर शिक्षा क्षेत्र के एक्सपर्ट्स ने रखी राय
/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
Follow Us