'ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन जैसी...." फिर झलकी नाराजगी, आखिर बंगाल के दौरे पर गईं राष्ट्रपति के साथ क्या हुआ?

पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में हिस्सा लिया. कार्यक्रम के लिए चुनी गई जगह को लेकर उन्होंने असंतोष जताया. उनका कहना था कि मैदान छोटा होने के कारण कई लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके, जबकि शहर में बड़ा मैदान उपलब्ध था.

पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में हिस्सा लिया. कार्यक्रम के लिए चुनी गई जगह को लेकर उन्होंने असंतोष जताया. उनका कहना था कि मैदान छोटा होने के कारण कई लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके, जबकि शहर में बड़ा मैदान उपलब्ध था.

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Ravi Prashant
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Droupadi Murmu

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू Photograph: (X/@rashtrapatibhvn)

पश्चिम बंगाल के दौरे पर आईं देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हाल ही में 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया. सिलीगुड़ी के फांसीदेवा इलाके में आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल होने के बाद राष्ट्रपति के तेवर थोड़े बदले हुए नजर आए. उन्होंने कार्यक्रम के लिए चुनी गई जगह को लेकर अपनी असंतुष्टि जाहिर की और बातों-बातों में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कटाक्ष भी किया. राष्ट्रपति का मानना था कि इतने बड़े और महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए जगह का चुनाव ठीक से नहीं किया गया था.

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छोटे मैदान को लेकर राष्ट्रपति ने क्यों उठाए सवाल?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कार्यक्रम के बाद साफ तौर पर कहा कि संथाल कॉन्फ्रेंस के लिए जो जगह तय की गई थी, वह बहुत छोटी थी. उन्होंने बताया कि जगह कम होने की वजह से संथाल समुदाय के बहुत से लोग चाहकर भी इस कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बन पाए. राष्ट्रपति के अनुसार, उस मैदान में पांच हजार लोगों के बैठने की भी सही व्यवस्था नहीं हो पा रही थी. एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन के लिए इतनी छोटी जगह का चुनाव करना उन्हें रास नहीं आया और उन्होंने इस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई.

विधाननगर मैदान को देखकर हुए आश्चर्यचकित

संथाल कॉन्फ्रेंस खत्म करने के बाद राष्ट्रपति एक दूसरे कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विधाननगर मैदान पहुंचीं. वहां का नजारा देखते ही वह हैरान रह गईं. उन्होंने देखा कि विधाननगर का मैदान काफी विशाल है और वहां लाखों लोग एक साथ जमा हो सकते हैं. इस बड़े मैदान को देखकर राष्ट्रपति ने कहा कि अगर संथाल कॉन्फ्रेंस का आयोजन यहां किया जाता, तो कम से कम पांच लाख लोग इसमें शामिल हो सकते थे. उन्होंने सवाल खड़ा किया कि जब शहर में इतना बड़ा मैदान मौजूद था, तो फिर अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस जैसे बड़े आयोजन के लिए इतनी तंग जगह क्यों चुनी गई?

ममता बनर्जी को बताया 'छोटी बहन' पर फिर भी कसा तंज

अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का जिक्र बड़े ही दिलचस्प अंदाज में किया. उन्होंने बड़े ही अपनेपन से कहा कि ममता बनर्जी उनके लिए छोटी बहन की तरह हैं और वह उन्हें बहुत प्यार करती हैं. राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ममता उनसे किसी बात पर नाराज हैं. लेकिन, इसके बावजूद उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि इतने बड़े कार्यक्रम के लिए छोटी जगह क्यों दी गई. उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे यह सोच लिया गया हो कि राष्ट्रपति छोटे मैदान में आएंगी, कार्यक्रम करेंगी और चुपचाप वापस लौट जाएंगी.

भीड़ के शामिल न हो पाने का रहा मलाल

राष्ट्रपति को सबसे ज्यादा इस बात का दुख था कि फांसीदेवा वाले कार्यक्रम में जगह की कमी के कारण संथाल समाज के लोग बड़ी संख्या में नहीं पहुंच सके. जब उन्होंने विधाननगर की खाली और बड़ी जमीन देखी, तो उनकी यह नाराजगी जुबां पर आ गई. उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए अपनी भावनाओं को खुलकर रखा और प्रशासन के इस फैसले पर हैरानी जताई. राष्ट्रपति के इस बयान के बाद अब इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इतने बड़े सरकारी आयोजन के लिए जगह के चुनाव में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई.

बड़े आयोजनों के लिए बड़ी सोच की जरूरत

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की इन बातों से एक बात साफ हो गई कि वह चाहती थीं कि उनके समाज और समुदाय के ज्यादा से ज्यादा लोग इस ऐतिहासिक कॉन्फ्रेंस का हिस्सा बनें. उन्होंने ममता बनर्जी के साथ अपने निजी रिश्तों की दुहाई देते हुए भी प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. यह मामला अब केवल एक कार्यक्रम की जगह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें राजनीति और रिश्तों की एक नई झलक भी देखने को मिली है.

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