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draupadi murmu Photograph: (ani)
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्र को संबोधित किया. इस दौरान राष्ट्रपति ने किसानों को लेकर बात की. उन्होंने कहा कि देश के किसान अन्न पैदा करके देश की सच्ची सेवा में लगे हैं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा,'हम भारत के लोग, देश और विदेश में पूरे जोश के साथ गणतंत्र दिवस मनाने जा रहे हैं. गणतंत्र दिवस का शुभ अवसर पर हमें अतीत, वर्तमान और भविष्य में हमारे देश के हालात और दिशा पर सोचने का मौका देता है.'
#WATCH | President Droupadi Murmu addresses on the eve of Republic Day 2026.
— ANI (@ANI) January 25, 2026
She says, "We, the people of India, at home and overseas, are going to celebrate Republic Day with fervour. The auspicious occasion of Republic Day gives us an opportunity to reflect on the status and… pic.twitter.com/KudhNbhhbo
संवैधानिक आदर्शों की ओर बढ़ा रहे
उन्होंने कहा, 'हमारे स्वतंत्रता आंदोलन की शक्ति ने 15 अगस्त, 1947 को हमारे देश के हालात बदल दिए. भारत आजाद हुआ. हम अपने राष्ट्रीय भाग्य के निर्माता बने. 26 जनवरी, 1950 से हम अपने गणतंत्र को अपने संवैधानिक आदर्शों की ओर बढ़ा रहे. उस दिन हमारा संविधान पूरी तरह से लागू हुआ.'
राष्ट्रवाद की भावना देश की एकता के लिए मजबूत आधार
राष्ट्रपति ने कहा, 'लोकतंत्र की जन्मभूमि भारत, औपनिवेशिक शासन से आजाद हुआ और हमारा लोकतांत्रिक गणराज्य अस्तित्व में आया. हमारा संविधान विश्व इतिहास के सबसे बड़े गणराज्य का मूलभूत दस्तावेज है. हमारे संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के आदर्श हमारे गणराज्य को परिभाषित करते हैं. संविधान निर्माताओं ने संवैधानिक प्रावधानों के जरिए राष्ट्रवाद की भावना और देश की एकता को मजबूत आधार प्रदान किया.'
हम अपने राष्ट्रीय भाग्य के निर्माता बने:मुर्मू
भारत स्वतंत्र हुआ. हम अपने राष्ट्रीय भाग्य के निर्माता बने. 26 जनवरी, 1950 से हम अपने गणतंत्र को अपने संवैधानिक आदर्शों की ओर अग्रसर कर रहे हैं. उस दिन हमारा संविधान पूर्णतः लागू हुआ. लोकतंत्र की जन्मभूमि भारत, दास प्रथा से मुक्त हुआ और हमारा लोकतांत्रिक गणतंत्र अस्तित्व में आया. हमारा संविधान विश्व इतिहास के सबसे बड़े गणतंत्र का आधारभूत दस्तावेज है. हमारे संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श हमारे गणतंत्र को परिभाषित करते हैं. संविधान निर्माताओं ने संवैधानिक प्रावधानों के माध्यम से राष्ट्रवाद की भावना और देश की एकता के लिए एक मजबूत आधार प्रदान किया."
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