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प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप Photograph: (X/whitehouse)
वित्त मंत्री ने आज यानी 1 फरवरी को संसद में बजट पेश करने जा रही हैं और इस बजट से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी को चौंका दिया है. जहां एक तरफ पूरा देश वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण और आर्थिक आंकड़ों पर नजरें गड़ाए बैठा था, वहीं दूसरी तरफ सात समंदर पार से आई एक खबर ने भारत के ऊर्जा समीकरणों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को एयर फ़ोर्स वन से फ्लोरिडा जाते समय पत्रकारों से बात करते हुए एक बड़ा खुलासा किया. उन्होंने कहा कि भारत अब ईरान के बजाय वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदेगा. ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हमने पहले ही वह डील कर ली है, कम से कम 'डील के कॉन्सेप्ट' पर सहमति बन गई है."
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक कूटनीति से जुड़ा है. अमेरिका चाहता है कि रूस को तेल की बिक्री से होने वाली कमाई कम की जाए, ताकि वह युद्ध के लिए फंड न जुटा सके. इस रणनीति के तहत अमेरिका ने भारत को रूसी तेल के विकल्प के रूप में वेनेजुएला का रास्ता दिखाया है. मीडिया रिपोर्ट्स भी बता रहे हैं कि भारत ने रूस से तेल लेना जनवरी में कम कर दिया है.
खबरों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने भारत को संदेश भेजा है कि वह वेनेजुएला से तेल की खरीद फिर से शुरू कर सकता है. यह फैसला चौंकाने वाला इसलिए भी है क्योंकि पिछले साल मार्च में खुद ट्रंप ने उन देशों पर 25% टैरिफ लगा दिया था जो वेनेजुएला से तेल खरीदते थे. अब उसी वेनेजुएला से तेल खरीदने के लिए भारत को हरी झंडी दी जा रही है.
बजट और आम आदमी पर इसका असर
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है. आज पेश हुए बजट में सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा और राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को कम करने पर जोर दिया है. ट्रंप के इस नए ऐलान के कई मायने हैं. वेनेजुएला का तेल अगर रियायती दरों पर मिलता है, तो भारत का आयात बिल कम होगा. अगर कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम काबू में रहेंगे, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा. भारत अब रूस और अमेरिका के बीच संतुलन बिठाते हुए अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकेगा.
चीन को भी दिया ऑफर
दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने केवल भारत ही नहीं, बल्कि चीन को भी इसी तरह की डील का न्योता दिया है. उन्होंने कहा कि चीन भी अमेरिका के साथ समझौता करके वेनेजुएला से तेल खरीद सकता है. इसका मतलब है कि अमेरिका अब तेल बाजार को अपने तरीके से नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है.
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