संसद में 'महा-संग्राम', सोमवार से शुरू हो रहे सदन में अध्यक्ष पद को लेकर होगा हंगामा

संसद का बजट सत्र सोमवार को सुबह 11 बजे शुरू होगा, विपक्ष ने सीधे अविश्वास का मोर्चा खोल दिया है तो सत्ता पक्ष ने भी जवाब देने की तैयारी कर ली है.

संसद का बजट सत्र सोमवार को सुबह 11 बजे शुरू होगा, विपक्ष ने सीधे अविश्वास का मोर्चा खोल दिया है तो सत्ता पक्ष ने भी जवाब देने की तैयारी कर ली है.

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Vikas Chandra
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parliament Photograph: (social media)

संसद का बजट सत्र इस बार विधायी कार्यों से ज्यादा 'कुर्सी' और 'शक्ति प्रदर्शन' के इर्द-गिर्द घूमता दिखाई देगा. ऐसे में संसद में 'महा-संग्राम' अध्यक्ष बनाम विपक्ष होने की पूरी संभावना है. सोमवार को सुबह 11 बजे जब संसद की कार्यवाही शुरू होगी, तो नजरें बजट पर कम और लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर ज्यादा होंगी. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शह-मात का खेल अब उस दहलीज पर पहुंच गया है जहां सीधे सदन के गार्जियन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला है, विपक्ष ने सीधे अविश्वास का मोर्चा खोल दिया है तो सत्ता पक्ष ने भी जवाब देने की तैयारी कर ली है.

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विपक्ष ने पक्षपात का आरोप लगाया  

बजट सत्र का दूसरा हिस्सा हंगामे की भेंट चढ़ने के पूरे आसार हैं. महागठबंधन और टीएमसी लोकसभा लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला को 'हटाने का प्रस्ताव' पर एक है. विपक्ष का सीधा आरोप है-पक्षपात का विपक्ष के नेता के अपमान का. राज्यसभा में जगदीप धनखड़ के खिलाफ जिस तरह विपक्ष ने पक्षपात का आरोप लगा कर सदन में हंगामा और आरोप लगाया था ठीक उसी तरह की घेराबंदी अब निचले सदन में ओम बिरला के खिलाफ दिखाई दे रहा है.

किसानों की समस्या और न्यूनतम समर्थन मूल्य

सरकार के खिलाफ विपक्ष के तरकश में केवल अध्यक्ष का मुद्दा नहीं है, बल्कि कई और तीर भी हैं अमेरिका के साथ ट्रेड डील और 'एबस्टीन फाइल्स' का जिन्न, विपक्ष के नेता को न बोलने देने का मुद्दा ,ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध और भारत की बदलती विदेश नीति, किसानों की समस्या और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP). लेकिन विपक्ष पहले अध्यक्ष के मुद्दे पर ही घेरने की तैयारी की है लेकिन सत्ता पक्ष यानी NDA भी हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठा है. बीजेपी ने अपने सांसदों के लिए 'थ्री-लाइन व्हिप' जारी कर दिया है. सरकार की कोशिश है कि विपक्ष को 'पहले दरवाजे' पर ही मात दे दी जाए.

50 सांसदों का समर्थन में खड़ा होना अनिवार्य

सत्ता पक्ष के पास बहुमत का आंकड़ा साफ है. इस लिए प्रस्ताव को लेकर सरकार बहुत परेशान नहीं है लेकिन रणनीति है कि वोटिंग की नौबत ही ना आए और प्रस्ताव गिर जाए. अगर नियम को देखा जाए प्रस्ताव सदन में आएगा, तो ओम बिरला अपनी अध्यक्ष की कुर्सी पर नहीं, बल्कि साधारण सदस्यों के बीच बैठेंगे. प्रस्ताव पेश करने के वक्त कम से कम 50 सांसदों का समर्थन में खड़ा होना अनिवार्य है. अगर 50 सांसद समर्थन में खड़े नहीं हुए, तो प्रस्ताव उसी वक्त खारिज हो जाएगा. प्रस्ताव सदन में स्वीकार हो और आगे कार्यवाही बढ़े इतना नंबर तो विपक्ष के पास तो है लेकिन विपक्ष ये भी जानता है कि उतने नंबर उनके पास नहीं हैं, लेकिन मकसद 'मैसेज पॉलिटिक्स' है. विपक्ष देश को यह दिखाना चाहता हैं कि सदन का संचालन निष्पक्ष नहीं हो रहा. दूसरी ओर, सत्ता पक्ष इसे विपक्ष की हताशा बताकर खारिज करने की तैयारी में है. साफ़ है कि सोमवार को शांति की उम्मीद कम और रस्साकशी  की संभावना ज्यादा है. लिहाजा सोमवार का दिन काफी गहमागहमी भरा होने वाला है.

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