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ऑपरेशन सिंदूर Photograph: (X)
ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारत की सख्त सैन्य कार्रवाई से पाकिस्तान बुरी तरह घबरा गया. अमेरिकी FARA दस्तावेजों के अनुसार पाकिस्तान ने युद्ध रुकवाने के लिए अमेरिका में व्यापक लॉबिंग की. इस प्रक्रिया में करोड़ों रुपये खर्च हुए और दर्जनों उच्चस्तरीय संपर्क किए गए.
अमेरिका में युद्ध रुकवाने की कोशिशें
अमेरिकी फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट यानी FARA के तहत सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान ने वॉशिंगटन में युद्ध रोकने के लिए जबरदस्त लॉबिंग की. इन दस्तावेजों के मुताबिक पाकिस्तान ने करीब आधा अरब रुपये तक खर्च किए और कम से कम 60 बार अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क किया. इनमें अमेरिकी विदेश विभाग, कांग्रेस के सदस्य और तत्कालीन ट्रंप प्रशासन से जुड़े अधिकारी शामिल थे.
किसी भी तरह मध्यस्थता हो जाए
दस्तावेजों में बताया गया है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने अमेरिकी लॉबिंग फर्मों के जरिए सीधे हस्तक्षेप की कोशिश की. उद्देश्य था कि अमेरिका भारत की सैन्य कार्रवाई को रोके और किसी भी तरह मध्यस्थता करे.
कारगिल में भी हुई थी लॉबिंग
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने अमेरिका का सहारा लिया हो. कारगिल युद्ध के दौरान भी तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से युद्ध रुकवाने की अपील की थी. ऑपरेशन सिंदूर के बाद की स्थिति ने उसी रणनीति की याद दिला दी.
7 मई 2025 का सैन्य अभियान
भारत ने 7 मई 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया. इस कार्रवाई में पाकिस्तान स्थित कई आतंकी ठिकानों और एयरबेस को गंभीर नुकसान पहुंचा. भारतीय कार्रवाई के बाद दोनों देशों की बीच तनाव चरम पर पहुंच गया.
ट्रंप से जुड़े लोगों तक पहुंच
FARA फाइलिंग के अनुसार पाकिस्तान ने सीडेन लॉ एलएलपी और जेवलिन एडवाइजर्स जैसी अमेरिकी फर्मों को हायर किया. इन फर्मों से जुड़े लोगों में डोनाल्ड ट्रंप के करीबी रहे जॉर्ज सोरियल और उनके पूर्व बॉडीगार्ड कीथ शिलर शामिल थे. इन संपर्कों का मकसद अमेरिकी सत्ता तंत्र तक सीधी पहुंच बनाना था.
कूटनीतिक दबाव की रणनीति
इन सभी प्रयासों से स्पष्ट है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान सैन्य के साथ-साथ कूटनीतिक मोर्चे पर भी दबाव में आ गया था. भारत की सख्त कार्रवाई ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बचाव की मुद्रा में ला खड़ा किया, जहां उसे अमेरिका के सामने बार-बार गुहार लगानी पड़ी.
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