ईरान ने भारत को भी दिया गहरा दर्द, मिसाइल अटैक में मारे गए दो भारतीय

ओमान की खाड़ी में एक तेल टैंकर 'स्काईलाइट' पर हुए हमले ने भारत के दो परिवारों को गहरे जख्म दिए हैं. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुए इस हमले में बिहार के कैप्टन आशीष कुमार और मुंबई के दीक्षित सोलंकी की जान चली गई है, जबकि राजस्थान के दिलीप सिंह अब भी लापता हैं.

ओमान की खाड़ी में एक तेल टैंकर 'स्काईलाइट' पर हुए हमले ने भारत के दो परिवारों को गहरे जख्म दिए हैं. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुए इस हमले में बिहार के कैप्टन आशीष कुमार और मुंबई के दीक्षित सोलंकी की जान चली गई है, जबकि राजस्थान के दिलीप सिंह अब भी लापता हैं.

author-image
Ravi Prashant
New Update
iran attack on ship

ईरान के अटैक में दो भारतीय की मौत (यह एआई इमेज है) Photograph: (Grok AI)

दुनिया भर में तेल की सप्लाई के लिए मशहूर ओमान की खाड़ी इस समय जंग के मैदान में तब्दील हो गई है. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सबसे बुरा असर उन बेकसूर लोगों पर पड़ रहा है, जो वहां अपना काम कर रहे हैं. ताजा मामला 'स्काईलाइट' (Skylight) नाम के एक तेल टैंकर का है, जिस पर भीषण हमला हुआ है. पलाऊ (Palau) के झंडे वाले इस जहाज पर हुए हमले में दो भारतीयों की मौत की पुष्टि हो गई है, जिससे भारत में उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.

Advertisment

बिहार के लाल कैप्टन आशीष की बहादुरी

इस हमले में जान गंवाने वाले कैप्टन आशीष कुमार बिहार के बेतिया के रहने वाले थे. आशीष तीन भाइयों में सबसे बड़े थे और अपने परिवार की रीढ़ थे. उनके पिता अशोक कुमार पेशे से वकील हैं और मां सुनीता देवी एक गृहणी हैं. आशीष ने इसी साल 20 जनवरी को मर्चेंट नेवी जॉइन की थी और उनकी पहली पोस्टिंग दुबई में हुई थी. 22 फरवरी को वे ओमान जाने वाले 'स्काईलाइट' जहाज पर कैप्टन के तौर पर सवार हुए थे. किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनकी आखिरी यात्रा साबित होगी.

5 साल का मासूम बेटा दक्ष अब भी देख रहा रा

कैप्टन आशीष के घर का माहौल इस समय बेहद गमगीन है. उनकी पत्नी अंशु कुमारी का रो-रोकर बुरा हाल है. सबसे ज्यादा दिल दुखाने वाली बात यह है कि उनका 5 साल का मासूम बेटा दक्ष, जिसे यह भी नहीं पता कि उसके पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे, वह अब भी दरवाजे पर टकटकी लगाए बैठा है. आशीष के भाई शुभम ने बताया कि उन्हें रविवार को सोशल मीडिया के जरिए हमले की खबर मिली थी, लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि आशीष सुरक्षित होंगे. हालांकि, कंपनी और दूतावास से मिली पुष्टि ने उनकी सारी उम्मीदें तोड़ दीं.

मुंबई के दीक्षित सोलंकी का दुखद अंत

इस हादसे में जान गंवाने वाले दूसरे भारतीय दीक्षित सोलंकी मुंबई के कांदिवली के रहने वाले थे. दीक्षित का परिवार पिछले कुछ महीनों से लगातार दुखों का सामना कर रहा है. पिछले साल ही दीक्षित की मां का निधन हुआ था, जिसके अंतिम संस्कार के लिए वे घर आए थे. मां के जाने के बाद वे अपने बूढ़े पिता और बड़ी बहन की जिम्मेदारी उठाने के लिए फिर से ड्यूटी पर लौट गए थे. जंग शुरू होने से ठीक पहले वे अपनी ड्यूटी पर पहुंचे थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.

राजस्थान के दिलीप सिंह की तलाश जारी

इस हमले में राजस्थान के नागौर जिले के रहने वाले दिलीप सिंह लापता बताए जा रहे हैं. दिलीप 22 जनवरी को इस जहाज पर क्रू मेंबर के तौर पर तैनात हुए थे. बताया जा रहा है कि जब मिसाइल जहाज के अगले हिस्से से टकराई, तब दिलीप कैप्टन आशीष के साथ वहीं मौजूद थे. जहाज पूरी तरह जल गया है और दिलीप का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है. कंपनी ने परिवार को उनके लापता होने की जानकारी तो दी है, लेकिन उनकी मौत की पुष्टि नहीं की है, जिससे परिवार अब भी किसी चमत्कार की उम्मीद कर रहा है.

आखिर ओमान में ही हमला क्यों हुआ?

ओमान का मुसैंडम प्रायद्वीप (Musandam Peninsula) इस समय बेहद संवेदनशील इलाका बना हुआ है. 'स्काईलाइट' जहाज ओमान के खसब बंदरगाह से महज 5 समुद्री मील दूर था, जब उसे निशाना बनाया गया. इस इलाके में ईरान की पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है और अमेरिका-इजरायल की जवाबी कार्रवाई के बाद से यहां हर आने-जाने वाले जहाज पर खतरा मंडरा रहा है. ओमान के सुरक्षा केंद्र ने बताया कि जहाज पर 20 लोग सवार थे, जिनमें 15 भारतीय और 5 ईरानी थे.

दुनिया की तेल की नस

हॉर्मुज का यह इलाका दुनिया के लिए कितना अहम है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया भर का करीब 20% तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है. सऊदी अरब, कुवैत, इराक और यूएई जैसे बड़े देश इसी पतले समुद्री रास्ते से अपना तेल और गैस एशिया और यूरोप तक भेजते हैं. अगर इस रास्ते पर हमले बढ़ते हैं या इसे ब्लॉक किया जाता है, तो पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी. यही वजह है कि यहां होने वाले हर हमले पर पूरी दुनिया की नजर रहती है.

सरकार से गुहार और आगे की राह

कैप्टन आशीष के भाई शुभम ने भारत सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से अपील की है कि वे इस मामले में दखल दें. परिवार चाहता है कि उनके भाइयों के पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाए जाएं ताकि वे अपनी मिट्टी में उनका अंतिम संस्कार कर सकें. इस युद्ध ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सत्ता की लड़ाई में सबसे बड़ी कीमत उन मासूम परिवारों को चुकानी पड़ती है, जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं होता. 

ये भी पढ़ें- युद्ध की आड़ में भारत में कट्टरपंथ फैलाने की साज‍िश, एआई के जर‍िए युवाओं को बनाया जा रहा न‍िशाना: आईबी

Advertisment