/newsnation/media/media_files/2026/02/19/sir-in-india-2026-02-19-19-01-39.jpg)
भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदाता सूची को और अधिक पारदर्शी व त्रुटिरहित बनाने के लिए देशव्यापी SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया है. आयोग के मुताबिक, इसी साल अप्रैल से यह अभियान पूरे देश में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. बता दें कि इससे पहले बिहार समेत 13 राज्यों में चुनाव आयोग की ओर से ये प्रक्रिया की जा चुकी है.
बिहार में यह प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है, जबकि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह काम फिलहाल जारी है. शेष राज्यों में अप्रैल से SIR की शुरुआत की जाएगी.
इन राज्यों में होगा SIR
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
झारखंड
महाराष्ट्र
कर्नाटक
आंध्र प्रदेश
अरुणाचल प्रदेश
चंडीगढ़
जम्मू और कश्मीर
लद्दाख
मणिपुर
मेघालय
मिजोरम
नागालैंड
ओडिशा
पंजाब
उत्तराखंड
तेलंगाना
त्रिपुरा
सिक्किम
दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
/filters:format(webp)/newsnation/media/media_files/2026/02/19/sir-order-2026-02-19-19-15-21.jpg)
क्या है SIR और क्यों जरूरी?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन एक विशेष अभियान है, जिसके तहत मतदाता सूची की गहन जांच की जाती है। इसमें मृत, स्थानांतरित या डुप्लिकेट नामों को हटाया जाता है और पात्र नागरिकों को जोड़ा जाता है.
चुनाव आयोग का मानना है कि नियमित संशोधन के अलावा समय-समय पर गहन समीक्षा जरूरी है, ताकि चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष और विश्वसनीय बनी रहे. यह अभियान विशेष रूप से उन राज्यों में अहम माना जा रहा है जहां हाल के वर्षों में बड़ी जनसंख्या गतिशीलता या शहरीकरण हुआ है.
बिहार बना मॉडल राज्य
बिहार में SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेटेड बताया जा रहा है. आयोग के अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया से हजारों डुप्लिकेट और अपात्र नाम हटाए गए, जबकि बड़ी संख्या में नए पात्र मतदाताओं को जोड़ा गया. इसी मॉडल को आधार बनाकर अब अन्य राज्यों में भी अभियान को तेज किया जाएगा.
अप्रैल से राष्ट्रव्यापी विस्तार
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि अप्रैल से यह प्रक्रिया शेष राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू होगी. इसके लिए बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है. साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी नागरिकों को अपने विवरण की जांच और संशोधन का अवसर मिलेगा.
पारदर्शिता और भरोसे की दिशा में कदम
ECI का कहना है कि यह पहल आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए की जा रही है, ताकि मतदाता सूची में किसी तरह की गड़बड़ी या विवाद की गुंजाइश न रहे.
यह भी पढ़ें - आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर ग्लोबल सहमति बनाना बहुत जरूरी है: वैसिलियोस मिखाइल
/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
Follow Us