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Jonas Gahr Støre (X@jonasgahrstore)
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद के लिए नोबेल शांति पुरस्कार चाहते थे, हालांकि नोबेल पुरस्कार कमेटी ने ट्रंप की बजाए वेनेजुएला की तत्कालीन विपक्षी नेता मचाडो को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया. ट्रंप को नोबेल प्राइज न मिलने का अब भी मलाल है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शांति पुरस्कार न मिलने की वजह से नॉर्वे की सरकार को घेरा था.
नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर ने खुद को इन बातों से अलग करते हुए सफाई दी. उन्होंने ट्रंप को साफ-साफ कह दिया कि नोबेल पुरस्कार देने के फैसले से नॉर्वे की सरकार को कोई भी लेना-देना नहीं है. नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने बताया कि मैंने राष्ट्रपति ट्रंप सहित सभी को साफ कर दिया कि ये बात सभी जानते हैं कि शांति पुरस्कार एक स्वतंत्र नोबेल समिति देती है न कि नॉर्वेजियन सरकार.
ट्रंप को नोबेल न मिलने का मलाल
ट्रंप ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री को एक मैसेज किया था कि मैंने आठ से अधिक युद्ध रुकवाया और दुनिया में शांति स्थापित की, ये तथ्य जानते हुए भी आपके देश ने मुझे नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया. अब मुझे पूरी तरह से शांति के बारे में सोचने की कोई भी जरूरत महसूस नहीं होती लेकिन मेरे लिए शांति हमेशा अहम रहेगी. लेकिन अब मुझे समझ आ गया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए क्या अच्छा है और क्या सही है. दरअसल, नोबेल शांति पुरस्कार नॉर्वे की एक स्वतंत्र समिति देती है. इसलिए ट्रंप ने डोनाल्ड ट्रंप ने नॉर्वे पर हमला किया था.
मचाडो ने ट्रंप को दिया अपना नोबेल प्राइज
हाल में वेनेजुएलाई नेता मचाडो ने डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में मुलाकात की थी. दोनों नेताओं ने इस दौरान, विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की. मचाडो ने व्हाइट हाउस यात्रा के दौरान, ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार दे दिया. उन्होंने कहा कि ये पहली बार है कि वेनेजुएला की जनता अमेरिका के किसी राष्ट्रपति को कुछ दे रही है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल था कि क्या ट्रंप को अब नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कहा जाएगा. तो नोबेल पुरस्कार कमेटी के नियमों के अनुसार,इसका जवाब है नहीं.
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