Noida Engineer Death: हादसे के बाद भी नहीं जागा प्रशासन, जहां गई इंजीनियर की जान, वहां 16 दिन पहले भी हुआ था एक्सीडेंट

Noida Engineer Death: सेक्टर-150 ग्रेटर नोएडा में पहले ट्रक हादसे के बावजूद सुरक्षा इंतजाम नहीं हुए, जिसकी कीमत एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपनी जान देकर चुकाई.

Noida Engineer Death: सेक्टर-150 ग्रेटर नोएडा में पहले ट्रक हादसे के बावजूद सुरक्षा इंतजाम नहीं हुए, जिसकी कीमत एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपनी जान देकर चुकाई.

author-image
Yashodhan Sharma
New Update
Noida Engineer death case

Noida Engineer death case

Noida Engineer Death: ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 के पास जिस जगह सॉफ्टवेयर इंजीनियर की दर्दनाक मौत हुई, वहां पहले भी बड़ा हादसा हो चुका था. 31 दिसंबर की रात को इसी स्थान पर एक ट्रक अनियंत्रित होकर नाले की बाउंड्री वॉल तोड़ते हुए आधे हिस्से में लटक गया था. उस हादसे में ट्रक चालक की जान तो बच गई थी, लेकिन बाउंड्री वॉल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी. अगले दिन क्रेन की मदद से ट्रक को बाहर निकाला गया, लेकिन इसके बाद भी प्राधिकरण ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया.

Advertisment

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर उस समय ही सुरक्षा इंतजाम दुरुस्त कर दिए जाते, तो बाद में हुए इस जानलेवा हादसे को रोका जा सकता था. सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के बाद एक बुजुर्ग पिता ने अपने बुढ़ापे की सबसे बड़ी सहारा खो दिया.

ट्रक हादसे के बाद भी नहीं लिया सबक

हादसे के बाद अब जाकर प्राधिकरण की नींद खुली है. शनिवार को बेसमेंट से पहले मिट्टी और मलबा डालकर रास्ता बंद करने की कोशिश की गई. टाटा यूरेका पार्क के निवासी और सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी कैप्टन जे.के. सिंह ने कहा कि ट्रक हादसे के बाद ही अगर सबक लिया जाता, तो शायद आज एक जान बची होती.

घटनास्थल पर सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं

घटनास्थल पर सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं है. न तो वहां पर्याप्त रोशनी है, न रिफ्लेक्टर और न ही चेतावनी देने वाले साइन बोर्ड. मोड़ पर सिर्फ सेक्टर-150 का एक नीला बोर्ड लगा है. स्पीड ब्रेकर तो बना है, लेकिन उस पर बनी सफेद पट्टियां मिट चुकी हैं. रात और कोहरे के समय यह जगह और भी खतरनाक हो जाती है.

जहां हादसा हुआ वहां क्या दिखे हालात

जिस बेसमेंट में हादसा हुआ, वहां खुदाई के बाद काम बंद पड़ा है. इसके बावजूद टीन शेड या पक्की बैरिकेडिंग नहीं की गई. आसपास की सोसाइटियों का पानी इसी खाली प्लॉट में छोड़ा जाता है. सीवर लाइन भी क्षतिग्रस्त है, जिससे पानी भर जाता है और झाड़ियां उग आई हैं.निवासियों का साफ कहना है कि अगर समय रहते बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर, स्ट्रीट लाइट और स्पीड ब्रेकर की सही मार्किंग होती, तो सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जान बच सकती थी.

यह भी पढ़ें: Noida इंजीनियर की मौत मामले में बड़ा एक्शन, अथॉरिटी CEO को हटाया, SIT करेगी जांच

Noida Engineer Death
Advertisment