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यूनिटेक प्रमोटरों का मिला अंडरग्राउंड कार्यालय, सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई की जेलों में किया ट्रांसफर

यूनिटेक प्रमोटरों का मिला अंडरग्राउंड कार्यालय, सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई की जेलों में किया ट्रांसफर

IANS | Edited By : IANS | Updated on: 26 Aug 2021, 05:15:01 PM
Unitech promoter

(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूनिटेक समूह के पूर्व निदेशकों संजय चंद्रा और उनके भाई अजय चंद्रा को दिल्ली की तिहाड़ जेल से मुंबई में आर्थर रोड जेल और तलोजा जेल में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया।

ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि उसने यहां एक गुप्त भूमिगत कार्यालय का पता लगाया है, जिसे पूर्व यूनिटेक के संस्थापक रमेश चंद्र द्वारा संचालित किया जा रहा था। पैरोल या जमानत पर उनके बेटे संजय और अजय द्वारा दौरा किया गया था।

एजेंसी ने आरोप लगाया है कि तिहाड़ जेल अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसा किया गया।

ईडी का प्रतिनिधित्व कर रहीं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल माधवी दीवान ने पीठ के सामने कहा कि तलाशी और जब्ती अभियान के दौरान एजेंसी ने एक गुप्त भूमिगत कार्यालय का पता लगाया, जिसका इस्तेमाल रमेश चंद्र कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि एजेंसी ने उस कार्यालय से सैकड़ों मूल बिक्री विलेख (सेल डीड्स) बरामद किए हैं। इसमें सैकड़ों डिजिटल हस्ताक्षर और कई कंप्यूटर भी मिले हैं, जिनमें भारत और विदेशों में उनकी संपत्तियों के संबंध में संवेदनशील डेटा है।

शीर्ष अदालत ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को इस आरोप की जांच करने का भी निर्देश दिया कि क्या चंद्र बंधुओं को तिहाड़ जेल से अवैध गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति दी गई थी, ताकि उनके खिलाफ जांच को बाधित किया जा सके।

एजेंसी ने शीर्ष अदालत को यह भी बताया कि भाइयों ने जेल के बाहर अपने निदेशरें को संप्रेषित करने के लिए अधिकारियों को भी प्रतिनियुक्त किया। उन्होंने कहा, वे (चंद्रा) जेल परिसर के अंदर से काम कर रहे हैं। उन्होंने पूरी न्यायिक हिरासत को ही बदलकर रख दिया है और इसे अर्थहीन बना दिया है।

सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक के पूर्व अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उन्हें मुंबई की जेलों में भेजने का आदेश सुना दिया।

संजय और अजय चंद्रा दोनों पर कथित तौर पर घर खरीदारों के पैसे की हेराफेरी करने का आरोप है। अक्टूबर 2017 में, शीर्ष अदालत ने उन्हें 31 दिसंबर, 2017 तक अपनी रजिस्ट्री के साथ 750 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया था।

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

First Published : 26 Aug 2021, 05:15:01 PM

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