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मंदिरों की खोई हुई भूमि का पता लगाने के लिए तमिलनाडु करेगा व्यापक भूमि सर्वे

मंदिरों की खोई हुई भूमि का पता लगाने के लिए तमिलनाडु करेगा व्यापक भूमि सर्वे

IANS | Edited By : IANS | Updated on: 09 Sep 2021, 09:30:01 PM
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(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

चेन्नई: तमिलनाडु हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (एचआर एंड सीई) विभाग राज्य में मंदिरों की खोई हुई भूमि का पता लगाने के लिए विभिन्न ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (डीजीपीएस) का उपयोग करके व्यापक सर्वे करेगा।

यह काम पूरा करने के लिए पहले ही 150 लाइसेंस प्राप्त सर्वेक्षकों को लगा चुका है।

2019-20 और 1988-90 के भूमि रिकॉर्ड विवरण ने तमिलनाडु में लगभग 50,000 एकड़ मंदिर की भूमि का एक बड़ा बेमेल दिखाया है। विभाग के अधिकारियों ने आईएएनएस को बताया कि हजारों भूमि के रिकॉर्ड गायब हैं।

मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने मानव संसाधन एवं सीई मंत्री पी.के. एक अधिकारी ने कहा कि सेकर बाबू 50,000 लापता भूमि रिकॉर्ड की रिपोर्ट आने के तुरंत बाद कार्रवाई करेंगे।

ग्राम प्रशासनिक अधिकारी क्षेत्र के नक्शे प्रदान करेंगे और सर्वे करने के लिए एचआर एंड सीई टीमों का समर्थन करेंगे। एचआर एंड सीई विभाग ने प्रमुख मंदिरों में तैनात होने के लिए 4 से 10 सर्वेक्षकों वाली टीमों के साथ सर्वेक्षणकर्ताओं की एक टीम को लगाया है।

आईएएनएस से बात करते हुए, शेखर बाबू ने कहा, तमिलनाडु सरकार मंदिर की भूमि पर अतिक्रमण नहीं होने देगी। साल 1988-90 और साल 2019-20 के भूमि अभिलेखों में 50,000 एकड़ का अंतर बड़ा है और हमने पहले से ही एक उचित सर्वेक्षण करने के लिए पेशेवर सर्वेक्षकों को लगाया है।

विभाग को एक साल में काम पूरा होने की उम्मीद है और राज्य के कई मंदिरों में लाखों पन्नों के कई रिकॉर्ड का ऑनसाइट सत्यापन शुरू हो गया है।

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

First Published : 09 Sep 2021, 09:30:01 PM

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