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सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के अधिकारी को बताया अहंकारी, 2 शीर्ष अधिकारियों की गिरफ्तारी का रास्ता साफ

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के अधिकारी को बताया अहंकारी, 2 शीर्ष अधिकारियों की गिरफ्तारी का रास्ता साफ

IANS | Edited By : IANS | Updated on: 13 Nov 2021, 10:05:01 PM
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(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को उत्तर प्रदेश सरकार की एक अपील को खारिज कर दिया, जिसके तहत अब राज्य के वित्त सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) की गिरफ्तारी हो सकती है।

शीर्ष अदालत ने यूपी सरकार की जमानती वारंट के खिलाफ दायर याचिका खारिज की है, जिससे अब वित्त सचिव समेत दो अधिकारियों की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली के साथ ही प्रधान न्यायाधीश एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार के वकील से कहा, उच्च न्यायालय को अब तक गिरफ्तारी का आदेश दे देना चाहिए था।

पीठ ने कहा कि इस मामले में कड़ी सजा की आवश्यकता है, क्योंकि अधिकारी एक कर्मचारी को उसके बकाया से वंचित कर रहे थे।

पीठ ने कहा, आपने आदेशों का पालन करने के लिए कुछ नहीं किया.. आपके मन में अदालत का कोई सम्मान नहीं है। यह अतिरिक्त मुख्य सचिव बहुत अहंकारी लग रहे हैं।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने आदेशों के विलंबित और आंशिक अनुपालन के लिए अधिकारियों के खिलाफ जमानती आदेश जारी किए थे। उच्च न्यायालय ने सेवा के नियमितीकरण और फोर्थ क्लास (चौथे वर्ग का कर्मचारी) कर्मचारी के पिछले वेतन बकाया की निकासी के लिए कई आदेश पारित किए थे।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि याचिकाकर्ता भुनेश्वर प्रसाद तिवारी की सेवा कलेक्शन अमीन या संग्रहण अमीन के रूप में नियमित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जिन कनिष्ठों को उनसे पहले नियमित रोजगार दिया गया था, उन्हें हटा दिया गया है और केवल वेतन का बकाया बाकी है। भाटी ने शीर्ष अदालत से मामले में नरम रुख अपनाने का आग्रह किया।

इस पर पीठ ने कहा, इसे देखिए..अदालत के आदेश के बावजूद यह अतिरिक्त मुख्य सचिव कह रहे हैं कि मैं उम्र में छूट नहीं दूंगा।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, याचिकाकर्ता (उत्तर प्रदेश राज्य) की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को सुनने के बाद और रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री को ध्यान से देखने के बाद, हमें उच्च न्यायालय द्वारा पारित अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता है। तदनुसार, विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है।

शीर्ष अदालत इलाहाबाद में एक कलेक्शन अमीन को सेवा के नियमितीकरण और बकाया भुगतान से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। 1 नवंबर को, उच्च न्यायालय ने कहा था कि अधिकारी अदालत के आदेशों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, क्योंकि उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति को वेतन का बकाया देने से इनकार कर दिया, जिसे पहले सेवा के नियमितीकरण के सही दावे से वंचित किया गया था।

उच्च न्यायालय ने कहा कि यह अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) और तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट संजय कुमार के खिलाफ जमानती वारंट जारी करने के लिए उपयुक्त मामला है, जो वर्तमान में सचिव (वित्त) के रूप में तैनात हैं। उच्च न्यायालय ने 15 नवंबर को उनके समक्ष पेश होने को कहा था और जमानती वारंट जारी किया था।

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

First Published : 13 Nov 2021, 10:05:01 PM

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