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सैनिकों का पूर्णत: पीछे हटना दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति पर आधारित आपसी कदमों से हो सकता है: MEA

भारत ने बृहस्पतिवार को कहा कि पूर्वी लद्दाख में सैनिकों का पूर्ण रूप से पीछे हटना दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति के आधार पर एक दूसरे द्वारा उठाये गए कदमों से ही हासिल किया जा सकता है.

Bhasha | Updated on: 28 Aug 2020, 05:00:00 AM
indo china

भारत-चीन सैनिक (Photo Credit: फाइल फोटो)

दिल्ली:

भारत ने बृहस्पतिवार को कहा कि पूर्वी लद्दाख में सैनिकों का पूर्ण रूप से पीछे हटना दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति के आधार पर एक दूसरे द्वारा उठाये गए कदमों से ही हासिल किया जा सकता है और इस बात को भी रेखांकित किया कि अतीत में सीमा से जुड़े मुद्दों का समाधान कूटनीति के जरिेये निकाला गया . विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा कि पूर्ण रूप से पीछे हटने के लिये प्रत्येक पक्ष को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अपनी-अपनी ओर नियमित चौकियों की तरफ सैनिकों की पुन: तैनाती करने की जरूरत है और यह यह दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति के आधार पर एक दूसरे द्वारा उठाये गए कदमों से ही हासिल किया जा सकता है.

विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल में एक साक्षात्कार में कहा था कि अतीत में सीमा से जुड़ी विभिन्न घटनाओं का समाधान कूटनीति के जरिये निकाला गया. उन्होंने कहा कि मैं विदेश मंत्री के हाल के साक्षात्कार का जिक्र करूंगा जिसमें उन्होंने कहा है कि सीमा से जुड़ी पिछली कई स्थितियों का समाधान राजनयिक माध्यम से निकाला गया. प्रवक्ता ने कहा कि विदेश मंत्री ने कहा कि जब समधान की बात आती है तब यह सभी समझौतों और सहमति का सम्मान करते हुए और यथास्थिति में कोई भी एकतरफा बदलाव का प्रयास किये बिना होना चाहिए.

बहरहाल, चीन ने कहा कि भारत को द्विपक्षीय संबंधों की वृहद तस्वीर को देखना चाहिए और उस दिशा में काम करना चाहिए तथा संबंधों को सामान्य विकास की पटरी पर लाने के लिये ठोस कदम उठाना चाहिए . चीन ने कहा कि भारत को सीमा मुद्दे को इस वृहद तस्वीर की उपयुक्त स्थिति में रखना चाहिए और गलत आकलन से बचना चाहिए. चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल वू कियान ने कहा कि दोनों पक्षों के प्रयासों की वजह से पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के अग्रिम पंक्ति के सैनिकों के पीछे हटने की दिशा में प्रगति हुई है.

उन्होंने कहा कि भारत और चीन एक-दूसरे के महत्वपूर्ण पड़ोसी देश हैं. सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता रखना एक-दूसरे के विकास के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं स्थितरता के लिये उपयुक्त होगा. उन्होंने कहा कि भारत, चीन के साथ इस साझा उद्देश्य के लिये काम कर सकता है, जब वह द्विपक्षीय संबंधों की बृहद तस्वीर को देखे और गलत आकलन से बचे.

बहरहाल, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा कि पूर्वी लद्दाख में सैनिकों का पूर्ण रूप से पीछे हटना दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति के आधार पर एक दूसरे द्वारा उठाये गए कदमों से ही हासिल किया जा सकता है. उन्होंने कहा, ‘‘यह ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है कि इसे हासिल करने के लिये दोनों पक्षों को सहमत बिन्दुओं पर कदम उठाने की जरूरत है. ’’ विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पिछले सप्ताह सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय संबंधी तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की 18 वीं बैठक में हुई बातचीत का भी उल्लेख किया.

उन्होंने कहा, ‘‘इस संदर्भ में डब्ल्यूएमसीसी की पिछली बैठक में दोनों पक्षों ने मौजूदा समझौतों और प्रोटोकॉल के तहत लंबित मुद्दों का शीघ्रता से समाधान निकालने पर सहमति जतायी थी.’’ विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि दोनों पक्षों ने यह स्वीकार किया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति की बहाली द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने स्वीकार किया था कि सैनिकों का पूरी तरह से पीछे हटना सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक, सैन्य माध्यमों से करीबी संवाद को बनाये रखने की जरूरत है.

प्रवक्ता ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बनी मौजूदा स्थिति को लेकर दोनों पक्षों के बीच स्पष्ट और गहन बातचीत हुई थी और उन्होंने पश्चिमी सेक्टर में एलएसी के पास सैनिकों को पूरी तरह से पीछे हटाने के लिए पूरी गंभीरता के साथ काम करने की बात दोहराई थी. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘इन्होंने इस बात की फिर से पुष्टि की थी कि वे दोनों देशों के विदेश मंत्रियों और दो विशेष प्रतिनिधियों के बीच बनी सहमति के अनुरूप पश्चिमी सेक्टर में एलएसी के पास सैनिकों के पूरी तरह से पीछे हटने के लिए पूरी गंभीरता के साथ काम करेंगे.’’ उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में दोनों पक्षों ने मौजूदा समझौतों और प्रोटोकॉल के तहत लंबित मुद्दों के जल्द निपटारे पर भी सहमति व्यक्त की थी.

गौरतलब है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 17 जून को अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ टेलीफोन पर चर्चा की थी, जिसमें दोनों पक्षों ने सम्पूर्ण स्थिति से जिम्मेदार ढंग से निपटने पर सहमति व्यक्त की थी . वहीं, पांच जुलाई को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी द्वारा सीमा विवाद सुलझाने के रास्तों की तलाश के लिये करीब दो घंटे तक टेलीफोन पर बातचीत हुई थी. डोभाल और वांग सीमा वार्ता के लिए विशेष प्रतिनिधि हैं. 

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First Published : 28 Aug 2020, 05:00:00 AM

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