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YSRCP Office Demolished: पूर्व CM की पार्टी कार्यालय पर चला बुलडोजर, टीडीपी बोली- 'अवैध थी बिल्डिंग'

जगन रेड्डी की पार्टी YSRCP के कार्यालय को ध्वस्त करने का मामला सुर्खियां बटोर रहा है. तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ने भी शनिवार को इस मामले में प्रतिक्रिया दी है.

Updated on: 22 Jun 2024, 07:08 PM

नई दिल्ली:

जगन रेड्डी की पार्टी YSRCP के कार्यालय को ध्वस्त करने का मामला सुर्खियां बटोर रहा है. तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ने भी शनिवार को इस मामले में प्रतिक्रिया दी है. TDP का कहना है कि, गुंटूर जिले के ताडेपल्ली में YSR कांग्रेस पार्टी के निर्माणाधीन कार्यालय को इसलिए ध्वस्त किया गया, क्योंकि यह सिंचाई विभाग की जमीन पर 'अवैध रूप से' बनाया जा रहा था. एन चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ पार्टी के अनुसार, टीडीपी नेता की शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई है.

इस मामले से जुड़ी टीडीपी की एक प्रेस रिलीज में बताया गया कि, "राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (CRDA) और मंगलगिरि ताडेपल्ली नगर निगम (MTMC) के नगर आयुक्तों के पास शिकायत दर्ज कराई गई थी कि, सिंचाई विभाग की दो एकड़ जमीन पर विपक्षी पार्टी का कार्यालय अवैध रूप से बनाया जा रहा है, जिसके बाद, MTMC अधिकारियों की देखरेख में YSRCP  नेताओं के इन अवैध निर्माणों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया."

छिड़ गया सियासी घमासान...

साथ ही बयान में यह भी आरोप लगाया गया कि, YSRCP प्रमुख वाईएस जगन मोहन रेड्डी, जो आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हैं, ने अपनी पार्टी के कार्यालय के निर्माण के लिए जमीन आवंटित करने के लिए सीएम के रूप में अपनी शक्ति का 'दुरुपयोग' किया था.

TDP ने दावा किया कि, "जगन मोहन रेड्डी ने इन दो एकड़ में कार्यालय बनाकर पड़ोसी 15 एकड़ जमीन पर कब्जा करने की योजना बनाई थी. अब यह स्पष्ट हो गया है कि, सिंचाई विभाग ने इन दो एकड़ जमीन को YSRCP को सौंपने की मंजूरी नहीं दी है."

सीएम पर प्रतिशोध की राजनीति का आरोप

वहीं इस विध्वंस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू पर 'प्रतिशोध की राजनीति को अगले स्तर पर ले जाने' और 'तानाशाह की तरह काम करने' का आरोप लगाया है. 

YSRCP ने टीडीपी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार पर उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद विध्वंस को अंजाम देने का आरोप लगाया, जिसमें सरकार से इस अभ्यास को रोकने के लिए कहा गया था.